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सोमा मुंडा हत्याकांड के विरोध में आज संपूर्ण झारखंड बंद का ऐलान, कुचाई रहेगा पूर्ण बंद, आदिवासी संगठनों ने उठाई न्याय की मांग

By Goutam

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जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर): खुंटी जिले के आदिवासी आंदोलनकारी एवं पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में 17 जनवरी 2026 को संपूर्ण झारखंड बंद का आह्वान किया गया है। इस बंद का व्यापक असर सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड में भी देखने को मिलेगा, जहां आदिवासी संगठनों ने पूर्ण बंद रखने की घोषणा की है।

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यह बंद भूमि लूट, खनन माफिया और आदिवासी समाज के खिलाफ हो रहे कथित सुनियोजित हमलों के विरोध में बुलाया गया है। बंद का आह्वान आदिवासी एकता मंच कुचाई सहित सभी सामाजिक संगठनों और दर्जनों आदिवासी संगठनों ने संयुक्त रूप से किया है। बंद के दौरान एम्बुलेंस जैसी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को छोड़कर सभी दुकानें, बाजार, परिवहन और आवागमन पूर्ण रूप से बंद रहेगा।

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आदिवासी संगठनों का कहना है कि सोमा मुंडा कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे 56 गांवों की पारंपरिक पड़हा व्यवस्था के प्रमुख थे। उन्होंने जीवनभर जल–जंगल–जमीन की रक्षा, संविधानिक अधिकारों और आदिवासी अस्मिता के लिए संघर्ष किया। संगठनों का आरोप है कि उनकी हत्या किसी व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम नहीं, बल्कि भूमि माफिया, खनन दलालों और कॉरपोरेट हितों के खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप कराने की एक साजिश है।

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बंद के समर्थन में शुक्रवार की शाम कुचाई चौक में आदिवासी एकता मंच एवं सामाजिक संगठनों द्वारा मशाल जुलूस निकाला गया। मशाल जुलूस के माध्यम से लोगों से 17 जनवरी के बंद को सफल बनाने की अपील की गई। इस दौरान क्षेत्र में भारी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे और न्याय की मांग को बुलंद किया।

मशाल जुलूस और बंदी के ऐलान में मुख्य रूप से सांसद प्रतिनिधि मानसिंह मुंडा, जीप सदस्य जींगी हेंब्रम, आदिवासी एकता मंच के अध्यक्ष मंगल सिंह मुंडा, मुखिया लुदरी हेंब्रम, डुमू गोप, केपी सेट सोय, टेने सोय, लुबुराम सोय, सुरेश सोय, लखीराम मुंडा, हरिश चंद्र बानरा, गोलाराम लोवादा, सालुका मुंडा, देवेंद्र सोय सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद थे।

आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट कहा कि जब तक सोमा मुंडा हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। 17 जनवरी का झारखंड बंद इसी संघर्ष की एक कड़ी है।

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