जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर): खूंटी जिले के आदिवासी नेता एवं पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के बाद पूरे झारखंड में आक्रोश का माहौल बना हुआ है। इसी के विरोध में शनिवार को आदिवासी संगठनों के आह्वान पर संपूर्ण झारखंड बंद रखा गया, जिसका व्यापक असर सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड में भी देखने को मिला।
सुबह से ही आदिवासी एकता मंच एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कुचाई बाजार को पूर्ण रूप से बंद रखा गया। बंदी के कारण परिवहन और आवागमन पूरी तरह ठप रहा। आदिवासी संगठनों के नेता मानसिंह मुंडा एवं मंगल सिंह मुंडा के नेतृत्व में लगभग छह घंटे तक, सुबह से दोपहर 1:30 बजे तक, कुचाई बाजार को शांतिपूर्ण तरीके से बंद कराया गया।
बंदी के दौरान आदिवासी नेताओं ने कहा कि सोमा मुंडा की हत्या से आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। समाज ने इस घटना को केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की परंपरा, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और अस्मिता पर सीधा हमला बताया है। कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में गुस्सा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट मांग की कि सोमा मुंडा के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कठोरतम सजा दी जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। संगठनों ने कहा कि अब केवल श्रद्धांजलि से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है।
आदिवासी समाज की प्रमुख मांगों में हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी, मामले की उच्चस्तरीय अथवा एसआईटी जांच, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और मुआवजा शामिल है। समाज ने प्रशासन से अपील की है कि दोषियों को कानून के कटघरे में लाकर न्याय सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता का भरोसा बना रहे।
आदिवासी संगठनों का कहना है कि यह घटना राज्य में बढ़ती आपराधिकता और आदिवासी समुदाय के भीतर बढ़ते असंतोष को दर्शाती है। झारखंड बंद के माध्यम से आदिवासी समाज ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जल-जंगल-जमीन, पारंपरिक नेतृत्व और अस्मिता पर किसी भी प्रकार के हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस दौरान मुख्य रूप से सांसद प्रतिनिधि मानसिंह मुंडा, विधायक प्रतिनिधि धमेंद्र सिंह मुंडा, सचिव मुन्ना सोय, जीप सदस्य जींगी हेंब्रम, आदिवासी एकता मंच के अध्यक्ष सह पूर्व प्रखंड अध्यक्ष मंगल सिंह मुंडा, मुखिया मंगल सिंह मुंडा, आसु हेंब्रम, लखीराम मुंडा, हरिश चंद्र बानरा, देवेंद्र सोय, कारु मुंडा, गोलाराम लोवादा, सालुका मुंडा, टेने सोय, चंद्र मोहन मुंडा, केपी सेट सोय, विशाल सोय, गोपाल मुंडा, सुरेश सोय, गुरुवा सिंह मुंडा, दामु मुंडा, विकास गोप, अशोक मानकी, सनातन कुंटीया सहित बड़ी संख्या में आदिवासी संगठन के लोग उपस्थित थे।
















