जनसंवाद, जमशेदपुर। टुईलाडुंगरी स्थित Sheetla Mata Temple Tuiladungri में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर ज्वारा महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक विधि बिरीह भिगोना के साथ श्रद्धा और उत्साह के बीच संपन्न हुई।
मंदिर परिसर में माता शीतला की पूजा-अर्चना के साथ छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार सात प्रकार के अनाज—गेंहू, जौ, उड़द, चना, मटर, मूंग और मसूर—को मिलाकर समाज के प्रमुख लोगों द्वारा मिट्टी के बड़े पात्र में जल के साथ भिगोया गया। यह प्रक्रिया ज्योत प्रज्वलन से एक दिन पूर्व की जाती है।
परंपरा के अनुसार, आज प्रातः इन अनाजों का मिट्टी और खाद के साथ रोपण किया जाएगा और शाम 4 बजे 23 अखंड ज्योत का प्रज्वलन होगा। मान्यता है कि इस विधि की शुरुआत भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव द्वारा की गई थी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ज्वारा के रंग से वर्ष की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। यदि ज्वारा हरा और सफेद होता है तो इसे समृद्धि और उन्नति का संकेत माना जाता है। वहीं यदि ज्वारा आधा हरा और आधा पीला हो, तो वर्ष का कुछ समय सुख और कुछ समय कठिनाई में बीतने की मान्यता है।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर समिति के स्थानीय जश गायन मंडली द्वारा जश गीत और भजन प्रस्तुत किए गए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिर समिति के अनुसार, ज्योत प्रज्वलन के बाद छत्तीसगढ़ से आई जश गायन मंडली द्वारा नौ दिनों तक लगातार जश गायन और मां की सेवा की जाएगी।
ज्योत प्रज्वलन कार्यक्रम में मुख्य रूप से राजू गिरी, सूरज भदानी और मंदिर समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।




















