जनसंवाद, जमशेदपुर। विश्व तपेदिक दिवस से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को आगाह करते हुए कहा है कि दो सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाली खांसी को हल्के में न लें, यह तपेदिक (टीबी) का शुरुआती संकेत हो सकता है।

ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल के पल्मोनोलॉजी एवं चेस्ट मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. जगदीश लोहिया ने बताया कि कई लोग लगातार खांसी को मौसम परिवर्तन या सामान्य सर्दी-खांसी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
उन्होंने बताया कि टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है और यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से हवा के माध्यम से फैलती है। इसके प्रमुख लक्षणों में लगातार खांसी, शाम के समय हल्का बुखार, वजन में कमी, थकान, भूख कम लगना और रात में पसीना आना शामिल हैं।
डॉ. लोहिया ने कहा कि समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे न केवल मरीज का इलाज संभव होता है, बल्कि संक्रमण को दूसरों तक फैलने से भी रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि टीबी की पहचान बलगम जांच, छाती के एक्स-रे और अन्य आधुनिक जांचों के माध्यम से आसानी से की जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि टीबी पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, बशर्ते मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयों का पूरा कोर्स पूरा करे। बीच में इलाज छोड़ने से दवा प्रतिरोधी टीबी का खतरा बढ़ जाता है, जिसका इलाज अधिक जटिल होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि यदि खांसी दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे या इसके साथ अन्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। समय पर इलाज जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाता है।
















