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आरआईटी : जागृति मैदान पर जनविस्फोट, ‘किसी एक वार्ड की जागीर नहीं’, चार वार्डों की एकजुटता के आगे निगम बैकफुट, प्रस्ताव ठंडे बस्ते में…

By Balram Panda

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आदित्यपुर / Balram Panda : आरआईटी स्थित जागृति मैदान में नगर निगम के प्रस्तावित भवन निर्माण को लेकर उठे व्यापक जनविरोध के बाद प्रशासन फिलहाल बैकफुट पर नजर आ रहा है, गुरुवार को मैदान में उमड़े जनसैलाब ने साफ संदेश दे दिया कि खेल के इस ऐतिहासिक मैदान पर किसी भी प्रकार का निर्माण किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा. जनदबाव के आगे निगम का प्रस्ताव फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है.

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प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग मैदान में एकत्र हुए और एक स्वर में नारेबाजी करते हुए कहा, यह खेल का मैदान है, खेल के लिए ही रहेगा. लोगों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मैदान पर निर्माण का प्रयास किया गया तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा.

स्थानीय निवासियों ने दो टूक कहा कि जागृति मैदान कोई साधारण जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि वर्षों से खेलकूद और युवाओं के सपनों की उर्वर भूमि रहा है, लोगों ने विशेष रूप से यह भी रेखांकित किया कि जब वार्ड 30 का अस्तित्व भी नहीं था, तब से इस मैदान में युवा खेलकूद कर अपने भविष्य को संवारते आए हैं, नगर परिषद/नगर निगम भवन बनने से भी पहले से यहां खेल गतिविधियां संचालित होती रही हैं. इस मैदान से कई युवाओं ने पुलिस और सेना में भर्ती की तैयारी कर सफलता हासिल की है। ऐसे में यह मैदान सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य और शहर की पहचान से जुड़ा हुआ है.

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महत्वपूर्ण बात यह है कि यह मैदान किसी एक वार्ड की संपत्ति नहीं, बल्कि वार्ड संख्या 27, 28, 29 और 30 के लोगों की साझा धरोहर है. हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ राजनीतिक तत्व इसे केवल वार्ड 30 का मुद्दा बनाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि तीनों वार्डों के लोग एकजुट होकर इस निर्माण प्रस्ताव का जोरदार विरोध कर रहे हैं.

प्रदर्शन के दौरान वार्ड पार्षद सुधीर चौधरी के खिलाफ भी लोगों में नाराजगी देखने को मिली. लोगों का आरोप है कि पार्षद निर्माण के पक्ष में खड़े हैं, जबकि क्षेत्र की आम जनता इसके खिलाफ है. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीति से प्रेरित नहीं, बल्कि जनभावनाओं और आने वाली पीढ़ी के भविष्य की रक्षा का आंदोलन है.

जनता ने प्रशासन को कड़ा संदेश देते हुए कहा, भवन कहीं भी बन सकता है, लेकिन मैदान दोबारा नहीं बनता, साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि मैदान पर निर्माण की कोशिश हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.

इधर, आदित्यपुर के मेयर संजय सरदार ने भी जनभावनाओं के समर्थन में बड़ा बयान देते हुए कहा, मैं पूरे आदित्यपुर का मेयर हूं, केवल एक वार्ड का नहीं। जहां स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं, वहां भवन नहीं बनेगा, जनभावना के खिलाफ कोई काम नहीं किया जाएगा.

इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जागृति मैदान अब केवल एक खेल का मैदान नहीं, बल्कि जनआस्था, युवा शक्ति और सामूहिक अधिकार का प्रतीक बन चुका है, जहां से उठी आवाज ने प्रशासन को निर्णय बदलने पर मजबूर कर दिया है.

 

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