आदित्यपुर / Balram Panda: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के भीतर संगठनात्मक असंतोष एक बार फिर सतह पर आ गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नगर उपाध्यक्ष मनोज गोराई ने आदित्यपुर नगर समिति और जिला समिति के गठन से लेकर पार्टी के कार्यक्रमों तक में लगातार नजरअंदाज किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है.
श्री मनोज गोराई ने सीधे तौर पर पार्टी के नगर और जिला नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें किसी भी संगठनात्मक निर्णय या कार्यक्रम की सूचना नहीं दी जाती, जो उनके मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला है. उन्होंने इसे संगठन के भीतर सक्रिय और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करार दिया.
उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य के गठन के बाद हुए पहले चुनाव से लेकर आज तक उन्होंने झामुमो के लिए पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम किया है. आदित्यपुर क्षेत्र में संगठन जब कमजोर स्थिति में था, तब उन्होंने जमीनी स्तर पर मेहनत कर संगठन को मजबूती दी. इसके अलावा पूरे सरायकेला विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने दिन-रात घूमकर पार्टी का प्रचार किया.
श्री गोराई ने आरोप लगाया कि उन्होंने हमेशा जातिगत और दलगत बंधनों से मुक्त होकर पार्टी हित में काम किया, लेकिन आज उसी पार्टी में उन्हें हाशिए पर धकेला जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत अपमान का मामला नहीं, बल्कि संगठन की दिशा और कार्यसंस्कृति पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है.
उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि इस पूरे प्रकरण को लेकर वे केंद्रीय नेतृत्व से सीधे मुलाकात करेंगे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को वास्तविक स्थिति से अवगत कराएंगे। उनके इस रुख से झामुमो के भीतर संगठनात्मक समन्वय, कार्यकर्ता सम्मान और नेतृत्व की जवाबदेही जैसे मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं..आदित्यपुर में झामुमो के अंदर उठी यह नाराजगी आने वाले समय में संगठन के लिए चुनौती बन सकती है.

























