जनसंवाद, खरसावां(उमाकांत कर)। सरायकेला-खरसावां जिले के अंतिम सीमावर्ती क्षेत्र तामाड़ विधानसभा अंतर्गत मानकीडीह पंचायत के गुंटी गांव स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय परिसर में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। ग्राम सभा की अध्यक्षता दुर्गा मुंडा ने की, जिसमें खरसावां विधायक दशरथ गागराई मुख्य रूप से शामिल हुए।
विशेष ग्राम सभा में विधायक दशरथ गागराई के पहुंचने पर ग्रामीणों में उत्साह देखा गया। इस दौरान उनके साथ प्रखंड अध्यक्ष सह विधायक प्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह मुंडा, थाना प्रभारी नरसिंह मुंडा, दलभंगा ओपी प्रभारी रविंद्र मुंडा, प्रखंड सचिव मुन्ना सोय, संगठन सचिव सह मुखिया करम सिंह मुंडा एवं युवा नेता राहुल सोय मौजूद रहे।
ग्राम सभा में ग्रामीणों ने विधायक को क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया। ग्रामीणों ने बारूहातु पंचायत के देशवा पहाड़ मध्य विद्यालय से गुंटी गांव तक लगभग छह किलोमीटर नई सड़क निर्माण तथा रोलाहातु पंचायत के आतरा गांव से गुंटी तक लगभग पांच किलोमीटर सड़क निर्माण की मांग रखी।
इसके अलावा ग्रामीणों ने राजकीय उच्च मध्य विद्यालय गुंटी, प्राथमिक विद्यालय जामपुड़ा, नव प्राथमिक विद्यालय डाऊजोबेला तथा नव प्राथमिक विद्यालय चपदलोर में नए स्कूल भवन निर्माण की मांग भी उठाई।
विधायक दशरथ गागराई ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चों को पठन-पाठन में हो रही परेशानियों को देखते हुए जल्द ही तामाड़ विधायक और संबंधित विभागीय अधिकारियों से वार्ता कर चारों विद्यालय भवन निर्माण कार्य को स्वीकृति दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने सड़क निर्माण कार्य को भी प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने का भरोसा दिया। विधायक ने कहा कि वे जनता के सेवक हैं और जनता की सेवा करना उनका कर्तव्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि भले ही गुंटी गांव उनके विधानसभा क्षेत्र में नहीं आता, लेकिन क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहेंगे और हर संभव मदद करेंगे।
ग्राम सभा में उपस्थित ग्रामीणों ने विधायक दशरथ गागराई का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुदूरवर्ती जंगल क्षेत्र होने के कारण यहां जनप्रतिनिधि बहुत कम पहुंचते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार किसी विधायक ने गांव पहुंचकर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना है।
बैठक में दुर्गा मुंडा, गुरबा मुंडा, सिंगराय मुंडा, बुधराम मुंडा, चिंतामणि मुंडा, बाबूलाल मुंडा, गंगी सोय, नंदी टूटी, कौशल्या देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।





















