जनसंवाद, जमशेदपुर। झारखंड में उच्च शिक्षा और विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई शुरुआत हुई है। राज्य में पहली बार किसी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में अंतरिक्ष भौतिकी (स्पेस फिजिक्स) को शामिल करने की दिशा में श्रीनाथ विश्वविद्यालय, जमशेदपुर और इंडियन सेंटर फॉर स्पेस फिजिक्स (ICSP), कोलकाता के बीच शुक्रवार को महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
समझौते पर श्रीनाथ विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. यह्या मजूमदार और भारतीय अंतरिक्ष भौतिकी केंद्र के निदेशक प्रो. (डॉ.) संदीप चक्रवर्ती ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर विश्वविद्यालय के डीन रिसर्च डॉ. शैलेश कुमार सारंगी, डीन प्रशासन डॉ. जे. राजेश और पाठ्यक्रम विकास की सहायक डीन डॉ. सुदर्शना बनर्जी मौजूद रहीं। विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि झारखंड में पहली बार किसी उच्च शिक्षण संस्थान के पाठ्यक्रम में स्पेस फिजिक्स को शामिल किया जा रहा है।
समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर अंतरिक्ष भौतिकी और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े आधुनिक पाठ्यक्रम विकसित करेंगे। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों को संयुक्त शोध परियोजनाओं, इंटर्नशिप, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, विशेषज्ञ व्याख्यान, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यशालाओं तथा वैज्ञानिक संगोष्ठियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
इस पहल के तहत विद्यार्थियों को कॉस्मिक किरणों का अध्ययन, एक्स-रे डिटेक्टर, रेडियो तीव्रता मापन, सौर गतिविधियों, स्पेस वेदर और हाई-एनर्जी एस्ट्रोफिजिक्स जैसे अत्याधुनिक विषयों पर कार्य करने का अवसर मिलेगा। साथ ही आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और अनुसंधान तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुसार यह समझौता राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के अनुसंधान आधारित, नवाचार उन्मुख और बहुविषयक शिक्षा के लक्ष्य को मजबूत करेगा। इससे विद्यार्थियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के नए अवसर प्राप्त होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल झारखंड में विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। इससे राज्य के विद्यार्थियों को पहली बार अपने ही प्रदेश में स्पेस फिजिक्स जैसे आधुनिक विषय की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा और भविष्य में इसरो (ISRO), अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में करियर बनाने के नए रास्ते खुलेंगे।
विश्वविद्यालय का कहना है कि यह समझौता न केवल उसकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि झारखंड को अंतरिक्ष विज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।








