आदित्यपुर / Balram Panda: कॉलोनी में बाहरी लोगों के वाहनों की पार्किंग को लेकर आखिर विवाद क्यों खड़ा हो रहा है? किसकी अनुमति से कॉलोनी में गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं और विरोध करने पर स्थानीय निवासियों को कथित रूप से धमकाने का मामला क्यों सामने आ रहा है? क्या आम नागरिकों को अपने ही घर और कॉलोनी में सुरक्षा के साथ रहने का अधिकार नहीं है? आदित्यपुर की न्यू स्वर्णरेखा कॉलोनी से सामने आई शिकायत ने ऐसे कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मामला 20 अक्टूबर 2026 का है, न्यू स्वर्णरेखा कॉलोनी के कर्मचारी नित्यानन्द कुम्हार ने आदित्यपुर थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देकर वार्ड संख्या 13 के निवासी विभूति गोराई और दिनेश गोराई पर गाली-गलौज करने, जान से मारने और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने का आरोप लगाया है, शिकायतकर्ता के अनुसार, गाड़ी पर स्क्रैच करने की बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जिसके बाद उन्हें और उनके पिता को जान से मारने की धमकी दी गई, उन्होंने पुलिस से अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.
इस पूरे मामले ने कॉलोनी में वाहनों की पार्किंग, स्थानीय निवासियों की सुरक्षा और कथित दबंगई को लेकर बहस तेज कर दी है, सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई नागरिक किसी विवाद पर आपत्ति जताता है, तो क्या उसे धमकी देकर चुप कराने की कोशिश की जाएगी? आखिर विवादों का समाधान कानून के दायरे में होगा या दबाव और धमकी के जरिए?
एक तरफ वार्ड 13 के पार्षद शांतनु घोष की पहल की सराहना किए जाने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी तरफ वार्ड 13 के ही क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति पर कॉलोनी में रहने वाले लोगों को धमकाने का आरोप लगा है, ऐसे में स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों और आम नागरिकों की सुरक्षा के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना भी जरूरी है.
अब निगाहें आदित्यपुर पुलिस पर हैं, शिकायत की निष्पक्ष जांच, धमकी के आरोपों की सत्यता का सत्यापन और कॉलोनी में वाहनों की पार्किंग से जुड़े विवाद का समाधान जरूरी है, यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसी भी नागरिक को भय के माहौल में नहीं रहना पड़े.
सवाल साफ है, कॉलोनी में शांति और सुरक्षा कायम करने के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाएगा? आखिर आम लोगों को अपने ही घर में सुरक्षित महसूस कराने की जिम्मेदारी किसकी है?

















