आदित्यपुर / Balram Panda: नगर निगम का डिप्टी मेयर चुनाव इस बार सत्ता, संगठन और सियासी वर्चस्व की निर्णायक जंग में तब्दील हो गया, चुनावी मैदान में एक ओर जहां अनुभवी दिग्गजों की मजबूत लॉबी और संगठनों का सुनियोजित गठजोड़ नजर आया, वहीं दूसरी ओर एक ऐसी दावेदारी उभरी जिसने पूरे राजनीतिक तंत्र को असहज कर दिया.
पूर्व पार्षद स्वर्गीय राजमणि देवी के परिवार से जुड़ी इस चुनौती ने सत्ता के स्थापित समीकरणों को खुली चुनौती दी. यही वजह रही कि वर्षों से एक-दूसरे के खिलाफ खड़े रहने वाले नेता, संगठन और राजनीतिक गुट अचानक एक मंच पर आ गए. सूत्रों की मानें तो यह चुनाव किसी पद से ज्यादा “एक व्यक्ति को रोकने” की रणनीति पर केंद्रित हो गया था.
सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज रही कि इस चुनाव ने पुरानी दुश्मनी, वैचारिक मतभेद और दलगत सीमाओं को ध्वस्त कर दिया. विरोध की राजनीति ने ऐसा रूप लिया, जहां विरोधी खेमों ने भी हाथ मिला लिया. यह एकजुटता स्वाभाविक नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है.
हालांकि नतीजा भले ही संगठन की एकजुट ताकत के पक्ष में गया हो, लेकिन इस दावेदारी ने यह साबित कर दिया कि अकेली चुनौती भी पूरे सियासी तंत्र को एक मंच पर लाने की ताकत रखती है.
डिप्टी मेयर का यह चुनाव अब आदित्यपुर की राजनीति में एक मिसाल बन गया है, जहां जीत से ज्यादा चर्चा उस सियासी गठजोड़ की हो रही है, जिसने वर्षों पुरानी अदावत को भी अपने मकसद के लिए भुला दिया, और यह संदेश दे गया कि सत्ता की जंग में सिद्धांत, संबंध और संघर्ष सभी परिस्थिति के अनुसार बदलते हैं, जहां अंतिम लक्ष्य सिर्फ जीत और वर्चस्व कायम करना होता है.



















