जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर)। सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड अंतर्गत दलभंगा ओपी के रोलाहातु पंचायत स्थित अतरा गांव में बुधवार को अफीम की अवैध खेती की रोकथाम को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया। दलभंगा ओपी प्रभारी नरसिंह मुंडा के नेतृत्व में हुए अभियान में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
मुंडारी में भी समझाया, अफीम से दूर रहने की अपील
ओपी प्रभारी नरसिंह मुंडा ने ग्रामीणों को हिंदी के साथ मुंडारी भाषा में भी अफीम की खेती के कानूनी, सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणामों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिना वैध अनुमति अफीम की खेती कानून के दायरे में अपराध है और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 18 के तहत अफीम पोस्ता की अवैध खेती दंडनीय है।
पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अफीम की खेती से दूर रहें और आसपास ऐसी गतिविधि की जानकारी मिलने पर पुलिस-प्रशासन को सूचित करें।
सब्जी, मक्का और हल्दी की खेती का दिया विकल्प
अभियान के दौरान ग्रामीणों को अफीम के बजाय सब्जी, दलहन, तिलहन, मक्का, अदरक, हल्दी और अन्य नकदी फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि वैध खेती के जरिए किसान अपनी आजीविका को मजबूत कर सकते हैं और कानूनी परेशानी से भी बच सकते हैं। ग्रामीणों को कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने तथा खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाने की भी सलाह दी गई।
पुलिस बोली- सिर्फ कार्रवाई नहीं, जागरूकता भी जरूरी
ओपी प्रभारी नरसिंह मुंडा ने कहा कि पुलिस और प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ग्रामीणों को जागरूक कर सही दिशा में आगे बढ़ाना भी है। उन्होंने ग्रामीणों से बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और नशामुक्त एवं अपराधमुक्त समाज बनाने में सहयोग की अपील की।
अभियान के दौरान ग्रामीणों को मुंडारी भाषा में भी समझाया गया कि अफीम की अवैध खेती से दूर रहकर वैकल्पिक खेती अपनाना परिवार और गांव के बेहतर भविष्य के लिए अधिक सुरक्षित रास्ता है। ग्रामीणों ने भी अफीम की खेती से दूर रहने और पुलिस-प्रशासन को सहयोग करने का भरोसा दिलाया।

















