होम 

राज्य

नौकरी

राजनीति

देश दुनिया

योजना

खेल समाचार

टेक

जमशेदपुर

धर्म-समाज  

वेब स्टोरी 

---Advertisement---

Resized Sharma Furniture Banner 1-01-01
previous arrow
next arrow
01 (48)
previous arrow
next arrow

 

 

सरायकेला पुलिस लाइन दुगनी में बाहा बोंगा मिलन समारोह, विधायक दशरथ गागराई संग पुलिस पदाधिकारी भी थिरके

By Goutam

Published on:

 

---Advertisement---

XAVIER PUBLIC SCHOOl
previous arrow
next arrow
04
previous arrow
next arrow

 

जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर)। सरायकेला के पुलिस लाइन दुगनी में सरहुल (बाहा बोंगा) मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में दशरथ गागराई शामिल हुए। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत, एसडीपीओ संजय सवैया, प्रशिक्षु डीएसपी पूजा कुमारी समेत विभिन्न थाना प्रभारी, पुलिसकर्मी और बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे।

समारोह में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बाहा बोंगा के सभी अनुष्ठान संपन्न किए गए। दिऊरी द्वारा अखाड़ा स्थल पर साल वृक्ष की डाली स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई और क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि एवं हरियाली की कामना की गई।

कार्यक्रम में आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। सभी ने अपने कानों में सरई (सखुआ) के फूल लगाकर सरहुल की परंपरा निभाई। ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक गीतों की धुन पर पूरा वातावरण उत्सवमय हो उठा।

मांदर और नगाड़ों की थाप पर ग्रामीणों ने सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें विधायक दशरथ गागराई और पुलिस पदाधिकारी भी शामिल हुए। विधायक गागराई ने स्वयं मांदर बजाकर और हो भाषा में गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनके साथ पुलिस अधीक्षक मुकेश लुणायत और अन्य अधिकारी भी नृत्य में शामिल होकर संस्कृति के रंग में रंगे नजर आए।

इस अवसर पर विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि बाहा बोंगा प्रकृति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है, जो मनुष्य और पर्यावरण के बीच अटूट संबंध को दर्शाता है। यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

वहीं पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत ने सभी को बाहा बोंगा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के गहरे संबंध का प्रतीक है। उन्होंने सभी से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

समारोह के दौरान देर रात तक पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते रहे, जिससे पूरा परिसर लोकसंस्कृति की रंगत में सराबोर रहा।

 

Leave a Comment