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टाटा स्टील ने आईआईटी (ISM) धनबाद में माइनिंग और मिनरल रिसर्च के लिए स्थापित किया सेन्टर फ़ॉर इनोवेशन

By Goutam

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सोशल संवाद/मुंबई: टाटा स्टील ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस), धनबाद में माइनिंग एंड मिनरल बेनिफिसिएशन में सेन्टर फ़ॉर इनोवेशन की स्थापना की है। कंपनी का लक्ष्य प्राकृतिक और शहरी खनन में तकनीकी समाधान विकसित करने और लो ग्रेड तथा जटिल अयस्कों से  लाभप्रदता के माध्यम से अपनी दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना है। केंद्र अनुसंधान से संबंधित प्रासंगिक

बुनियादी संरचनाओं के विकास को सुदृढ़ बनाएगा, प्रतिभाओं को आकर्षित करेगा, और राष्ट्रीय महत्व के रणनीतिक क्षेत्रों में उद्योग-शिक्षाविद सहयोगी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद करेगा। इस केंद्र का निर्माण शैक्षणिक उत्कृष्टता के केंद्रों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने और चिन्हित, रणनीतिक क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी समूहों की स्थापना पर टाटा स्टील के फोकस से जुड़ा हुआ है।

डॉ. देबाशीष भट्टाचार्जी, वाइस प्रेसिडेंट, टेक्नोलॉजी एंड न्यू मैटेरियल्स बिजनेस, टाटा स्टील ने कहा कि: “उद्योग और शिक्षाविदों के बीच सहयोग इनोवेशन की भावना जगाने और सस्टेनेबल कारोबार विकास में सहायता करने के लिए महत्वपूर्ण है। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद टाटा स्टील के रणनीतिक, दीर्घकालिक और अल्पकालिक व्यावसायिक हितों – खनन और खनिज लाभकारी क्षेत्रों में से एक में उत्कृष्ट प्रतिभा पूल के साथ एक मजबूत शैक्षणिक और अनुसंधान मंच प्रदान करता है।

टाटा स्टील से प्राप्त 22 करोड़ रुपये से इस सेंटर फॉर इनोवेशन के निर्माण के साथ, हम स्थानीय खानों और अयस्कों के लिए प्रासंगिक प्रौद्योगिकियों को संयुक्त रूप से विकसित करने और उन्नयन के लिए तत्पर हैं। इस केंद्र में होने वाला कार्य  प्राकृतिक और शहरी खनन के लिए प्रौद्योगिकी विकास को कवर करेगा। यह केंद्र लो-ग्रेड अयस्कों के बेनिफिशिएशन और वैल्यू एडिशन पर भी काम करेगा।  टाटा स्टील शैक्षणिक संस्थानों के साथ सक्रिय जुड़ाव के माध्यम से अग्रणी क्रांतिकारी विकास की दिशा में प्रतिबद्ध है।”

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के निदेशक प्रोफेसर राजीव शेखर ने कहा कि: हमें टाटा स्टील लिमिटेड के साथ आईआईटी (आईएसएम) में “टाटा स्टील इनोवेशन सेंटर ऑन माइनिंग एंड मिनरल रिसर्च (आईसीएमएमआर)” के रूप में सेंटर फॉर इनोवेशन (सीओई) स्थापित करने पर खुशी है। यह उद्योग-संस्थान सहयोग को मजबूत और आपसे फायदे के लिए वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने में मदद करेगा। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, माइनिंग, मिनरल्स एंड अर्थ साइंसेज के क्षेत्र में एक विश्व प्रसिद्ध संस्थान है जो इस अनूठी पहल पर टाटा स्टील लिमिटेड के साथ काम करके बेहद खुश है। शिक्षा जगत और उद्योग को ऐसी सहजीवी साझेदारी बनाने की जरूरत है जो दोनों को लाभ पहुंचाए।

इस तरह के सहयोगी प्रयास एक कुशल कार्यबल बनाने के अलावा प्रौद्योगिकी विकास में अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे। इस संयुक्त सहयोग के माध्यम से, हम अपने शोधकर्ताओं को तैयार करने के लिए नवीनतम तकनीकी प्रगति का लाभ उठाने के लिए तत्पर हैं और एक हरित और सुरक्षित भविष्य के लिए सस्टेनेबल, नवीन प्रक्रियाओं के विकास की दिशा में काम करते हैं।”

उभरती नॉलेज इकोनॉमी के परिपेक्ष्य में वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी पर प्रौद्योगिकी-सक्षम नेतृत्व का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। स्वदेशी कच्चे माल में तकनीकी मुद्दों की जटिलताओं को देखते हुए, यह महत्वपूर्ण है कि उद्योग और शिक्षाविद प्रौद्योगिकी नेतृत्व, अनुसंधान उत्कृष्टता और राष्ट्रीय महत्व के तकनीकी समाधान प्राप्त करने के लिए सहयोग करें।

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद प्रतिष्ठा और क्षमता का एक प्रतिष्ठित संस्थान है, जो तकनीकी विचार नेतृत्व में योगदान देगा और टाटा स्टील के अनुसंधान एवं विकास कौशल को और मजबूत करेगा। इनोवेशन सेंटर की स्थापना रणनीतिक रूप से आस-पास के अन्य अनुसंधान संस्थानों, नियामक निकायों, और अधिक महत्वपूर्ण रूप से प्रशिक्षित और कुशल कार्यबल का लाभ उठाने के लिए की गई है।

केंद्र झारखंड राज्य में अपनी तरह का अनूठा केंद्र होगा और युवाओं को अनुसंधान और विकास की ओर आकर्षित करने का लक्ष्य रखेगा। यह केंद्र आगे चलकर प्रसिद्ध विशेषज्ञों को आकर्षित करके और पूर्ण समाधान प्रदान करने के लिए ओईएम के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाकर अनुसंधान उत्कृष्टता प्राप्त करने का लक्ष्य रखेगा।

वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विकास और सस्टेनेबल खनन के माध्यम से कच्चे माल की सोर्सिंग में एक सदी से अधिक के अनुभव के साथ, टाटा स्टील की दीर्घकालिक रणनीति मौजूदा रॉ मैटेरियल रिसोर्सेज को विकसित करने और अपने वैश्विक परिचालनों में कच्चे माल की सुरक्षा हासिल करने के लिए तैयार की गई है। माइनिंग और मिनरल्स क्षेत्र में टाटा स्टील और आईआईटी (आईएसएम) के ठोस अनुसंधान और विकास प्रयास, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और देश में खनिकों के कौशल को मजबूत करने के लिए भारत की स्थिति को मजबूत बनाएगा।

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