जनसंवाद, जमशेदपुर: सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय गौरव की भावना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’, ‘सशक्त भारत, समृद्ध भारत’ तथा ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में सरदार पटेल के अद्वितीय नेतृत्व, दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वतंत्र भारत की रियासतों के एकीकरण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया गया।
कुलपति ने राष्ट्रीय एकता को बताया भारत की सबसे बड़ी शक्ति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल महान राष्ट्रनिर्माता थे। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और असाधारण नेतृत्व क्षमता से स्वतंत्र भारत की रियासतों को एक सूत्र में पिरोने में निर्णायक भूमिका निभाई। उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकात्मता का प्रतीक है। भारत की भाषायी, सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने सभी से भेदभाव और संकीर्ण विचारों से ऊपर उठकर आपसी विश्वास, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाने की अपील की।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि युवा राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिकता, अनुशासन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध, नवाचार और कौशल के माध्यम से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।
डॉ. शिवचन्द्र झा ने राष्ट्रीय एकता को राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला बताया
राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का व्यक्तित्व राष्ट्रीय एकता, दृढ़ नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने रियासतों के एकीकरण के माध्यम से भारत की राष्ट्रीय अखंडता को मजबूत आधार प्रदान किया। उनका जीवन सामूहिक संकल्प, पारस्परिक विश्वास, त्याग और राष्ट्र के प्रति निष्ठा का संदेश देता है।
डॉ. झा ने कहा कि राष्ट्रीय एकता केवल किसी विशेष दिवस पर व्यक्त किया जाने वाला संकल्प नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के विचारों, व्यवहार और कर्तव्यों में दिखाई देने वाला जीवनमूल्य है। संविधान के आदर्शों का सम्मान, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता, सामाजिक न्याय और सभी समुदायों के प्रति समान आदर राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र के बौद्धिक, नैतिक और सामाजिक भविष्य के निर्माण के केंद्र हैं। विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और जनकल्याण के माध्यम से समाज की समस्याओं के समाधान में योगदान देना चाहिए।
कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने सामाजिक सद्भाव और नागरिक कर्तव्यों पर दिया बल
कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि राष्ट्रीय एकता किसी भी देश की स्थिरता, प्रगति और समृद्धि का मूल आधार है। भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति हमें एक-दूसरे की भाषाओं, परंपराओं और विचारों का सम्मान करना सिखाती है। राष्ट्र की वास्तविक शक्ति तभी विकसित होती है, जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को ज्ञानवान बनाने के साथ-साथ उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन, मानवीय संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक चेतना का विकास करना भी है। ज्ञान के साथ विवेक और अधिकारों के साथ कर्तव्यबोध ही सशक्त समाज के निर्माण का आधार है।
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने दिया ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण, साहस, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता और ऐतिहासिक नेतृत्व से सिद्ध किया कि राष्ट्रीय एकता किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होती है।
श्री सिंह ने कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम, राष्ट्र सर्वोपरि’ प्रत्येक नागरिक के जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए। भारत को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण, वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 का लक्ष्य केवल सरकार या किसी एक संस्था का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक संकल्प है। आज के विद्यार्थियों के ज्ञान, चरित्र, परिश्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण में ही भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव निहित है।
डॉ. प्रियंजना बनर्जी ने किया मंच संचालन
कार्यक्रम का मंच संचालन बंगला विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंजना बनर्जी ने किया। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक पहचान उसकी सांस्कृतिक विविधता और उस विविधता को एक सूत्र में बांधने वाली राष्ट्रीय एकात्मता में निहित है। सरदार पटेल के आदर्श हमें पारस्परिक सम्मान, सहिष्णुता, भाईचारे और सामूहिक उत्तरदायित्व के माध्यम से मजबूत राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि भाषाएं अनेक और संस्कृतियां विविध हो सकती हैं, लेकिन भारतीयता का भाव सभी को एक सूत्र में जोड़ता है। उन्होंने शिक्षा एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को राष्ट्रीय चेतना के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों से अन्य संस्कृतियों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता रखने की अपील की।
राष्ट्रीय एकता की शपथ के साथ लिया राष्ट्रसेवा का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान सहायक कुलसचिव श्रीमती अर्चना सिंह ने उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा बनाए रखने तथा देशवासियों के बीच सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में इस बात पर बल दिया गया कि सोना देवी विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक समरसता का विकास करने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे युवाओं का निर्माण करना है, जो ज्ञान और कौशल के साथ नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनशीलता तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना से भी संपन्न हों।
कार्यक्रम का संदेश रहा कि भारत की विविधता उसकी पहचान है, एकता उसकी शक्ति है और सामाजिक समरसता उसकी ऊर्जा है। सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों को आत्मसात कर तथा अपने नागरिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करके ही एक सशक्त, समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के स्वप्न को साकार किया जा सकता है।

















