सरायकेला / Balram Panda: राजनगर प्रखंड के बेसिक स्कूल मैदान में रविवार को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली इतिहास, अधिकार और सामाजिक एकजुटता का जोरदार संदेश देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंहभूम सांसद जोबा माझी शामिल हुईं। विशिष्ट अतिथि के रूप में झामुमो नेता एवं शिक्षाविद् प्रोफेसर केपी सोरेन, झामुमो केंद्रीय सदस्य कृष्णा बास्के, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष भुगलू सोरेन और दुर्गा लाल मुर्मू मौजूद रहे.

कार्यक्रम स्थल पर आदिवासी समाज की पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत और लोक संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। पारंपरिक परिधान में पहुंचे लोगों ने अपनी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया। लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को आदिवासी रंग में रंग दिया.
सांसद जोबा माझी ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक एकजुटता में निहित है। उन्होंने समाज के लोगों से संगठित रहने और अपनी गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों और पहचान की रक्षा के लिए समाज को जागरूक होकर एकजुटता के साथ आगे बढ़ना होगा.

वहीं झामुमो नेता एवं शिक्षाविद् प्रोफेसर केपी सोरेन ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज के संघर्ष और बलिदान को रेखांकित करते हुए केंद्र सरकार पर आदिवासी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास संघर्ष, त्याग और बलिदान से भरा रहा है। आज जरूरत है कि समाज अपने इतिहास और अधिकारों को समझे तथा अपने हक की आवाज को मजबूती से उठाए.
केपी सोरेन ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री की ओर से संदेश नहीं आना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों की पहचान को कमजोर करने के लिए उन्हें ‘वनवासी’ कहे जाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी पहचान, संवैधानिक अधिकार और अस्तित्व की रक्षा के लिए सजग रहना होगा। अधिकार मांगने से नहीं मिले तो लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर उन्हें हासिल करना होगा.

हर घर तिरंगा अभियान को लेकर भी केपी सोरेन ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि तिरंगा देश के लोगों के दिल में बसता है, उसके लिए अलग से दिखावे की आवश्यकता नहीं है। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी महापुरुषों, वीर शहीदों और समाज के संघर्ष को याद करना ज्यादा महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निवास करता है तथा झारखंड में भी विभिन्न जनजातीय समुदाय अपनी विशिष्ट भाषा, परंपरा और संस्कृति के साथ सदियों से रहते आए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव आयोजित करने का संकल्प आदिवासी समाज की संस्कृति और पहचान को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है.

कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समुदाय के मेधावी बच्चों को सम्मानित किया गया। वहीं सांसद जोबा माझी ने प्रभात खबर के स्थानीय रिपोर्टर सुरेंद्र मार्डी और दैनिक जागरण के स्थानीय रिपोर्टर पीतांबर सोय को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया.
कार्यक्रम में पूरे उत्साह के साथ आदिवासी समाज की पहचान, अस्मिता, संस्कृति, इतिहास, अधिकार और एकजुटता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम ने साफ तौर पर यह संदेश दिया कि आधुनिक दौर में विकास के साथ कदमताल करते हुए आदिवासी समाज अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

















