जनसंवाद, घाटशिला। सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में विद्यार्थियों और शोधार्थियों के शोध कौशल, नवाचार एवं अकादमिक दक्षता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार को विशेष Research Workshop का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शोधार्थियों को आधुनिक शोध पद्धतियों, तकनीकी संसाधनों और प्रभावी शोध प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शोध की गुणवत्ता एवं मौलिकता बढ़ाने के साथ शोध को सामाजिक उपयोगिता से जोड़ना रहा। इस दौरान शोध विषय के चयन, शोध समस्या की पहचान, साहित्य समीक्षा, डेटा विश्लेषण, अकादमिक लेखन और डिजिटल शोध संसाधनों के उपयोग जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।
‘शोध केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं’
कार्यक्रम का शुभारंभ सोना देवी विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने किया। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान केवल शिक्षण से नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और ज्ञान-सृजन से भी निर्धारित होती है।
उन्होंने कहा कि शोध केवल डिग्री हासिल करने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि नए ज्ञान की खोज, स्थापित धारणाओं के विश्लेषण और सामाजिक समस्याओं के समाधान का माध्यम है। एक गुणवत्तापूर्ण शोध में मौलिकता, तार्किकता, प्रमाणिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक प्रासंगिकता जरूरी है।
शोध कौशल और नवाचार पर विशेषज्ञ का मार्गदर्शन
कार्यशाला के विशेषज्ञ प्रवीण कुमार महतो (Prabin Kumar Mahato), फैकल्टी मेंबर, रिसर्च एंड HPC डिवीजन, JCERT ने शोधार्थियों को Research Skills, Research Competency और Innovation के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शोध विषय के चयन, शोध समस्या की पहचान, उद्देश्य निर्धारण, साहित्य समीक्षा, आंकड़ों के विश्लेषण, शोध निष्कर्ष और शोध लेखन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने कहा कि शोध में केवल उपलब्ध सूचनाओं को एकत्र करना पर्याप्त नहीं है। शोधार्थियों को उपलब्ध ज्ञान का आलोचनात्मक और तार्किक विश्लेषण करते हुए नए दृष्टिकोण एवं निष्कर्ष सामने लाने का प्रयास करना चाहिए।
डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर
विशेषज्ञ ने कहा कि डिजिटल युग में शोध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। ऑनलाइन जर्नल, डिजिटल डेटाबेस, शोध संसाधन और आधुनिक तकनीकी उपकरणों ने शोध के क्षेत्र को व्यापक बनाया है। ऐसे में शोधार्थियों के लिए पारंपरिक शोध पद्धतियों के साथ डिजिटल दक्षता विकसित करना भी आवश्यक है। कार्यशाला के दौरान शोधार्थियों ने विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञ ने विस्तार से जवाब दिया।
‘शोध और नवाचार विश्वविद्यालय की प्राथमिकता’
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि किसी उच्च शिक्षण संस्थान की प्रगति का आकलन उसके शोध और नवाचार की गुणवत्ता से भी किया जाता है। सोना देवी विश्वविद्यालय शोधार्थियों को ऐसा अकादमिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां वे स्वतंत्र सोच विकसित कर सकें और नए विचारों पर काम कर सकें।
उन्होंने शोधार्थियों से कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान को अपने शोध कार्य में लागू करने और शोध को अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी बनाने का आह्वान किया।
गुणवत्तापूर्ण शोध से मजबूत होती है अकादमिक पहचान
कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा कि उच्च शिक्षा के वर्तमान दौर में शोध और नवाचार की भूमिका महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय का दायित्व केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, विश्लेषणात्मक क्षमता और नवाचार की भावना विकसित करना भी है।
उन्होंने शोधार्थियों से अपने शोध को समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं से जोड़ने का प्रयास करने की अपील की। साथ ही नियमित अध्ययन और नवीनतम शोध साहित्य से अपडेट रहने पर जोर दिया।
‘शोध समाज और राष्ट्र के विकास का माध्यम बने’
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शोध किसी राष्ट्र की बौद्धिक और ज्ञान-संपदा को समृद्ध करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने शोध में मौलिकता, गुणवत्ता, अनुशासन, नवाचार और सामाजिक सरोकार को महत्व देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि शोधार्थियों को अपने ज्ञान को समाज के व्यापक हित से जोड़ना चाहिए। सामाजिक समस्याओं को समझने और नए समाधान विकसित करने वाला शोध समाज के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। उन्होंने शोधार्थियों को “सीखें, प्रश्न करें, विश्लेषण करें और नए ज्ञान का सृजन करें” की भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
शोधार्थियों में दिखा उत्साह
कार्यशाला के दौरान शोधार्थियों ने विशेषज्ञ के साथ संवाद करते हुए शोध प्रक्रिया, नवाचार, अकादमिक लेखन और आधुनिक तकनीकी संसाधनों से जुड़े सवाल पूछे।
कार्यशाला के माध्यम से शोधार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए विषय ज्ञान के साथ शोध कौशल, तकनीकी दक्षता, आलोचनात्मक चिंतन, नवाचार और निरंतर सीखना भी आवश्यक है।
आभार ज्ञापन के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कंचन सिन्हा ने विशेषज्ञ प्रवीण कुमार महतो, कुलाधिपति प्रभाकर सिंह, कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा, कुलसचिव डॉ. नीत नयना, विश्वविद्यालय के शिक्षकों और सभी शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं शोधार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक शोध कौशल विकसित करने में मदद करती हैं। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

















