जनसंवाद, जमशेदपुर। डिमना में प्रस्तावित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल की जमीन पर कचरा डंपिंग को लेकर विरोध अब डिमना से पारडीह चौक तक फैलने लगा है। एनजीटी की ओर से गठित संयुक्त समिति को स्थल का निरीक्षण दो सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन 7 अक्टूबर तक निरीक्षण नहीं होने का दावा आंदोलन के आवेदक सौरभ विष्णु ने किया है।
एनजीटी के आदेश के बाद भी नहीं हुआ निरीक्षण
23 सितंबर 2026 को एनजीटी की पूर्वी क्षेत्र पीठ ने मूल आवेदन संख्या 202/2026/EZ में सीपीसीबी, झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पूर्वी सिंहभूम के जिला दंडाधिकारी के प्रतिनिधियों वाली संयुक्त समिति गठित की थी। आदेश में समिति को दो सप्ताह के भीतर बैठक कर स्थल का दौरा करने, आवेदक और संबंधित परियोजना पक्ष के प्रतिनिधि को साथ लेकर वास्तविक स्थिति की जांच करने तथा उचित उपचारात्मक उपाय सुझाने का निर्देश दिया गया था। रिपोर्ट छह सप्ताह में दाखिल करनी है। मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को निर्धारित है।
सौरभ विष्णु का कहना है कि उन्होंने 3 और 5 अक्टूबर को निरीक्षण की तिथि को लेकर संबंधित अधिकारियों को लिखित पत्र दिए, लेकिन उन्हें अब तक निरीक्षण की तारीख की जानकारी नहीं मिली।
आंदोलन अब सोसाइटी से निकलकर बस्तियों तक
निरीक्षण नहीं होने के बीच आंदोलन का दायरा भी बढ़ा है। बुधवार को डिमना बस्ती में स्थानीय लोगों की बैठक हुई, जिसमें लोगों ने आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया और हस्ताक्षर अभियान शुरू किया।
इससे पहले मंगलवार को वसुंधरा एस्टेट के पास हुए धरने में डिमना बस्ती, हिल विहार कॉलोनी, रेबिट कॉलोनी और आसपास की बस्तियों के लोग शामिल हुए थे। स्थानीय वार्ड पार्षद बापी दास ने भी धरने में पहुंचकर समर्थन जताया था।
अब वसुंधरा एस्टेट विकास समिति का विस्तार कर इसका नाम ‘डिमना-पारडीह चौक विकास समिति’ रखा गया है। समिति के दायरे में डिमना गोलचक्कर से पारडीह चौक तक एनएच-33 के आसपास की बस्तियों और कॉलोनियों को शामिल करने की बात कही गई है।
कचरा शेड और कॉम्पैक्टर लगाने का भी विरोध
समिति की ओर से नगर निगम को लिखित आपत्ति देने की तैयारी की जा रही है। इसमें एनएच-33 के किनारे या रिहायशी इलाकों के आसपास कचरा शेड अथवा कॉम्पैक्टर लगाए जाने का विरोध किया जा रहा है।
सौरभ विष्णु ने कहा कि उनका कहना है कि यह मामला अब केवल एक सोसाइटी तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, कचरा और उससे जुड़ी समस्याओं का असर आसपास रहने वाले सभी लोगों पर पड़ सकता है।
जमीन की स्थिति बदलने का भी लगाया आरोप
सौरभ विष्णु ने दावा किया कि एनजीटी के आदेश के बाद कचरे के बड़े हिस्से को जमीन में दबाकर स्थल को समतल किया गया और चारदीवारी का एक हिस्सा भी तोड़ा गया। हालांकि, यह उनके द्वारा किया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि निरीक्षण से पहले स्थल की स्थिति में बदलाव होने पर वास्तविक स्थिति की जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि आदेश, पत्राचार, तारीखों और स्थानीय निवासियों से मिले वीडियो सहित उपलब्ध सामग्री को एनजीटी के समक्ष रखा जाएगा।
सौरभ विष्णु बोले- अब मामला एनजीटी के सामने उठाएंगे
सौरभ विष्णु ने कहा कि निरीक्षण नहीं होने के बाद अब वे इस स्थिति को एनजीटी के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन कानूनी प्रक्रिया के साथ स्थानीय स्तर पर भी जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि यह मामला अब एक सोसाइटी तक सीमित नहीं है और डिमना से पारडीह चौक तक की बस्तियों एवं कॉलोनियों को साथ लेकर आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।

















