जनसंवाद, जमशेदपुर। नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी (NSU) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में शुक्रवार को विद्यार्थियों द्वारा निर्मित फिल्म ‘सफर’ का प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर फिल्म निर्माण से जुड़े विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया और उनके रचनात्मक प्रयासों की सराहना की गई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी भी शामिल हुए।

करियर की चुनौतियों और प्लान बी का संदेश
फिल्म ‘सफर’ में विद्यार्थियों के सामने आने वाली करियर संबंधी चुनौतियों और सही समय पर लक्ष्य के अनुरूप रास्ता चुनने के महत्व को दिखाया गया है। फिल्म का संदेश है कि सफलता के लिए मेहनत के साथ वैकल्पिक योजना यानी **प्लान बी** तैयार रखना भी जरूरी है। किसी एक प्रयास में सफलता नहीं मिलने पर निराश होने के बजाय अपनी रुचि और क्षमताओं के अनुसार नए अवसर तलाशने चाहिए।
कुलाधिपति और कुलपति ने की सराहना
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने विद्यार्थियों के प्रयास पर गर्व जताते हुए कहा कि ऐसी कहानियां आज के विद्यार्थियों के लिए प्रासंगिक हैं। लक्ष्य तय करने के साथ वैकल्पिक योजना रखना भी जरूरी है, ताकि एक रास्ते पर सफलता नहीं मिलने पर आगे बढ़ने का दूसरा विकल्प मौजूद रहे।
कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने कहा कि जीवन का सफर लंबा होता है। विद्यार्थियों को हौसला बनाए रखते हुए लगातार प्रयास करना चाहिए। सफलता के लिए अपनी रुचि पहचानना, परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना और नए अवसरों के लिए तैयार रहना महत्वपूर्ण है।
वरुण देव ने किया फिल्म का निर्देशन
फिल्म ‘सफर’ का निर्देशन वरुण देव ने किया। तुषार सागर ने डीओपी की जिम्मेदारी निभाई, जबकि पटकथा नूपुर महतो ने लिखी और एडिटिंग सुमित कुमार ने की। फिल्म में सत्यम कुमार तिवारी, अनन्या लेप्पी, एकता शरण, सुमिष्टि मंडल, मणि पांडेय और कौशिक भट्टाचार्य ने अभिनय किया।
विश्वविद्यालय के अधिकारी और विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम में रजिस्ट्रार नागेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोजिब अशरफ, अकादमिक सलाहकार प्रो. दिलीप शोम, आईक्यूएसी निदेशक डॉ. गरिमा सिंह, डीन (एडमिनिस्ट्रेशन) डॉ. राकेश कुमार और डीन (एकेडमिक) अभिनव कुमार सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में फिल्म की प्रोडक्शन टीम, विश्वविद्यालय के विधि विभाग और पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। फिल्म प्रदर्शन के माध्यम से विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को रचनात्मक कार्यों के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने की पहल की।

















