जनसंवाद, जमशेदपुर। दुर्गापूजा के अवसर पर नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय, जमशेदपुर की सांस्कृतिक समिति की ओर से एक दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘दुर्गोत्सव 3.0’ का आयोजन किया गया। ‘आधुनिक समाज में प्रतिबिंबित दिव्य ऊर्जा की शक्ति’ थीम पर आयोजित इस महोत्सव में 400 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम में सोलो डांस, ग्रुप डांस, सोलो सिंगिंग, ग्रुप सिंगिंग और रैंप वॉक जैसी प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी कला, रचनात्मकता और सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति से विश्वविद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल रहा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह, कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि, रजिस्ट्रार नागेंद्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोजिब अशरफ, अकादमिक सलाहकार प्रो. दिलीप शोम, आईक्यूएसी निदेशक डॉ. गरिमा सिंह, डीन एडमिनिस्ट्रेशन डॉ. राकेश कुमार और डीन एकेडमिक अभिनव कुमार सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक उपस्थित रहे।
भारतीय संस्कृति और आधुनिकता का संगम
‘दुर्गोत्सव 3.0’ का उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं, देवी दुर्गा की दिव्य शक्ति और आधुनिक समाज में नारी शक्ति, साहस, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा के महत्व को रेखांकित करना था। महोत्सव की थीम के माध्यम से भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक मूल्यों और आदर्शों को समकालीन जीवन से जोड़ने का संदेश दिया गया।
सोलो और ग्रुप डांस प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने नृत्य के माध्यम से अपनी कला और अभिव्यक्ति का प्रदर्शन किया। एकल एवं समूह गायन में संगीत की विविधता देखने को मिली, जबकि रैंप वॉक में प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और रचनात्मकता का परिचय दिया।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने कहा कि दुर्गापूजा केवल आस्था और उपासना का पर्व नहीं है, बल्कि यह शक्ति, साहस, सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक भी है। ‘दुर्गोत्सव 3.0’ जैसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने, भारतीय संस्कृति से जुड़ने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थी शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं।
कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक चेतना का विकास करना भी है। ऐसे सांस्कृतिक महोत्सव विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, टीम भावना विकसित करने और विभिन्न कलाओं के प्रति सम्मान का भाव पैदा करने का अवसर देते हैं।
उन्होंने कहा कि ‘दुर्गोत्सव 3.0’ की थीम दिव्य ऊर्जा और आधुनिक समाज के बीच सार्थक संबंध स्थापित करती है। विश्वविद्यालय भविष्य में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए इस प्रकार के आयोजनों को प्रोत्साहित करता रहेगा।
विजयी प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित
पूरे आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों की सहभागिता से परिसर में सांस्कृतिक एकता, सहयोग और रचनात्मक अभिव्यक्ति का वातावरण बना। कार्यक्रम के अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
‘दुर्गोत्सव 3.0’ ने धार्मिक उत्सव की भावना को सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और युवा ऊर्जा के साथ जोड़ते हुए परंपरा और आधुनिकता के समन्वय का संदेश दिया। इस आयोजन ने विद्यार्थियों के बीच भारतीय विरासत, कला और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

















