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श्रीनाथ यूनिवर्सिटी में फार्मास्युटिकल साइंसेज पर राष्ट्रीय सेमिनार, शोध और नवाचार पर जोर

By Goutam

Published on:

 

श्रीनाथ यूनिवर्सिटी फार्मास्युटिकल सेमिनार
 

जनसंवाद, जमशेदपुर। श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फार्मेसी की ओर से मंगलवार को फार्मास्युटिकल साइंसेज पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। ‘इमर्जिंग फ्रंटियर्स इन फार्मास्युटिकल साइंसेज: इंटीग्रेटिंग रिसर्च, इनोवेशन, एजुकेशन एंड पेशेंट केयर’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में दवाओं की खोज, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और मरीजों की देखभाल में फार्मास्युटिकल साइंसेज की भूमिका पर चर्चा हुई।

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दीप प्रज्वलन के साथ हुआ उद्घाटन

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कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुई। इसके बाद अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर सेमिनार का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सेमिनार की स्मारिका का विमोचन किया गया। स्कूल ऑफ फार्मेसी के विद्यार्थियों ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया।

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व्यावहारिक कौशल और आधुनिक अनुसंधान पर जोर

श्रीनाथ कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य डॉ. प्रशांत कुमार महापात्र ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि फार्मेसी के विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल और पेशेवर दक्षता भी विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने दवा की खोज एवं विकास, कंप्यूटेशनल तकनीकों और ट्रांसलेशनल रिसर्च के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की आवश्यकता बताई।

मानव कल्याण में फार्मास्युटिकल साइंसेज की अहम भूमिका

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. एस. एन. सिंह ने कहा कि फार्मास्युटिकल विज्ञान में अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने तथा मानव जीवन की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ऐसे पेशेवर तैयार करने पर जोर दिया, जो अपने वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग समाज के हित में कर सकें।

झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल के सदस्य और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) की कार्यकारी समिति के सदस्य धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सेमिनार जैसे आयोजन विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को विचार साझा करने तथा नई तकनीकों से परिचित होने का अवसर प्रदान करते हैं।

नैनो तकनीक और दवा अनुसंधान पर चर्चा

सेमिनार के विशिष्ट वक्ता प्रो. (डॉ.) अनिंद्य बोस, स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज, शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर ने नैनोपार्टिकल्स और फार्मास्युटिकल अनुसंधान की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नैनो तकनीक से जुड़े शोध वैज्ञानिक अध्ययन के नए रास्ते खोल रहे हैं। उन्होंने इस तरह के शैक्षणिक आयोजनों को विशेषज्ञों और विद्यार्थियों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए उपयोगी बताया।

आधुनिक दवा वितरण प्रणाली और एआई पर भी चर्चा

सेमिनार में आधुनिक दवा वितरण प्रणाली, फार्माकोलॉजी, टॉक्सिकोलॉजी, प्राकृतिक उत्पादों पर आधारित अनुसंधान, क्लिनिकल फार्मेसी और फार्मास्युटिकल बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों के फार्मास्युटिकल साइंसेज में उपयोग पर चर्चा की गई।

आयोजन का उद्देश्य अंतर्विषयक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना, विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना और शैक्षणिक संस्थानों, शोधकर्ताओं तथा उद्योग जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देना रहा।

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