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कालिकापुर में आदिवासी शक्ति का जुटान, गणेश महाली ने भरी हुंकार—पहचान, अधिकार और एकता के लिए संगठित होने का आह्वान…

By Balram Panda

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गम्हरिया / Balram Panda: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बोडो पीड़ मोड़े माझी बाबा एवं खेरवाल सांवता जाहेर गाड़ समिति, कालिकापुर–टायो गेट के संयुक्त तत्वावधान में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, कार्यक्रम में आदिवासी समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक अस्मिता और अधिकारों की मजबूती का संदेश गूंजा.

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कार्यक्रम में सरायकेला विधानसभा के झामुमो के पूर्व प्रत्याशी गणेश महाली, झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मुर्मू, बीएचयू के प्रोफेसर राजू मांझी, उद्यमी के डायरेक्टर रवि राज मुर्मू तथा चांडिल महाविद्यालय के प्राचार्य सुनील मुर्मू सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए.

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इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान केवल उसकी परंपराओं तक सीमित नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन, भाषा, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ी हुई है, विश्व आदिवासी दिवस समाज को अपनी गौरवशाली विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित होने का अवसर देता है.

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झामुमो नेता गणेश महाली ने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपरा सदियों से देश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, इसे संरक्षित करना सामूहिक जिम्मेदारी है, उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और पहचान से जोड़ते हुए शिक्षा, रोजगार और विकास के अवसरों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी जरूरत है.

वक्ताओं ने कहा कि समाज की मजबूती के लिए शिक्षा, सामाजिक एकता और राजनीतिक जागरूकता को बढ़ावा देना जरूरी है। जब समाज अपनी भाषा, संस्कृति और अधिकारों को लेकर जागरूक होगा, तभी विकास की प्रक्रिया में अपनी मजबूत और निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित कर सकेगा.

कार्यक्रम के दौरान आदिवासी लोककला, पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया, पारंपरिक वेशभूषा और लोकनृत्य के जरिए आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली.

कार्यक्रम में भोमरा मांझी, उदय मार्डी, गोरखा हेंब्रम, सावना सोरेन, शोखेन हेंब्रम, लक्ष्मण, शंभू टुडू, गौरीशंकर टुडू सहित समिति के सभी पदाधिकारी, क्षेत्र के मांझी बाबा एवं बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे.

कार्यक्रम ने एक ओर जहां आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया, वहीं एकजुटता, पहचान, अधिकार और नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक संकल्प का संदेश भी दिया.

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