जमशेदपुर, जमशेदपुर। नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय हिंदी दिवस एवं राष्ट्रीय अभियंता दिवस के अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और तकनीकी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय सांस्कृतिक समिति की ओर से हिंदी भाषा की समृद्ध विरासत, रचनात्मकता और महत्व को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। वहीं प्लेसमेंट सेल एवं डिपार्टमेंट ऑफ इंजीनियरिंग के संयुक्त तत्वावधान में “नवाचार और डिजिटलीकरण के माध्यम से सतत भविष्य के लिए स्मार्ट इंजीनियरिंग” विषय पर अतिथि व्याख्यान सह एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई।
दोनों आयोजनों में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भाषा, रचनात्मकता, उद्यमिता तथा तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह, कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि, कुलसचिव नागेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोजिब अशरफ, शैक्षणिक सलाहकार प्रो. दिलीप शोम, डीन एडमिनिस्ट्रेशन डॉ. राकेश कुमार, डीन एकेडमिक अभिनव कुमार सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
हिंदी दिवस पर विद्यार्थियों की रचनात्मकता को मिला मंच
राष्ट्रीय हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताओं का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उनकी अभिव्यक्ति, कल्पनाशीलता और रचनात्मक क्षमता को मंच देना था।
कविता पाठ प्रतियोगिता में बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की शादान नाजनीन ने प्रथम, गुनगुन अग्रवाल ने द्वितीय और बी.फार्म की आलिया समर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
चित्र-कथा लेखन में रचनात्मक लेखन का प्रदर्शन
हिंदी चित्र-कथा लेखन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को दिए गए चित्रों के आधार पर लघु कहानी लिखने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल करते हुए रोचक और संदेशपरक कहानियां प्रस्तुत कीं।
इस प्रतियोगिता में डी.फार्म की रिम्शा इश्तियाक प्रथम, बीबीए की शादान आफरीन द्वितीय और डी.फार्म के द्राक्षन इस्लाम तृतीय स्थान पर रहे।
‘पिच योर आइडिया’ में स्टार्टअप और बिजनेस आइडिया पेश
‘पिच योर आइडिया’ प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा में पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बिजनेस आइडिया, स्टार्टअप मॉडल, सामाजिक कल्याण योजनाओं और नवाचार आधारित विचार प्रस्तुत किए।
इस प्रतियोगिता में लाइबा नय्यर एवं श्रेया सिन्हा की टीम ने प्रथम और लवली कुमारी एवं हिमांशु कुमार की टीम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
हिंदी गीत प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बांधा समां
हिंदी गीत प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने हिंदी के लोकप्रिय और शुद्ध गीतों की प्रस्तुति दी। इसमें बी.एड की श्रुति दास ने प्रथम, बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की अमना महमूद एवं अलीशा इमाम ने संयुक्त रूप से द्वितीय तथा बी.एड की मेमॉन रॉय ने तृतीय स्थान हासिल किया।
स्मार्ट इंजीनियरिंग और सतत विकास पर हुआ मंथन
राष्ट्रीय अभियंता दिवस के अवसर पर आयोजित अतिथि व्याख्यान सह एकदिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों को स्मार्ट इंजीनियरिंग, डिजिटलीकरण, इनोवेशन और सतत विकास के बदलते स्वरूप से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ललाटेंदु महापात्र, एजीएम, टाटा मोटर्स लिमिटेड, जमशेदपुर और राकेश जलान, टीम लीड, टाटा टेक्नोलॉजीज, जमशेदपुर रहे। दोनों विशेषज्ञों ने अपने औद्योगिक अनुभव साझा करते हुए आधुनिक इंजीनियरिंग में डिजिटल तकनीक, संसाधनों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ समाधानों की भूमिका पर चर्चा की।
AI, ऑटोमेशन और डेटा एनालिटिक्स पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
ललाटेंदु महापात्र ने कहा कि वर्तमान औद्योगिक परिवेश में इंजीनियरिंग तेजी से डिजिटल तकनीकों के साथ एकीकृत हो रही है। विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ समस्या समाधान, नवाचार और व्यावहारिक सोच विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
राकेश जलान ने कहा कि डिजिटलीकरण ने इंजीनियरिंग के स्वरूप को व्यापक रूप से बदला है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स और स्मार्ट सिस्टम आने वाले समय में उद्योगों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त ज्ञान को वास्तविक औद्योगिक समस्याओं से जोड़कर सीखने की सलाह दी।
भाषा और तकनीक दोनों में दक्ष बनने का संदेश
कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें ज्ञान, कौशल, संस्कार और रचनात्मक सोच से समृद्ध करना है। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस विद्यार्थियों को भाषा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है, जबकि अभियंता दिवस आधुनिक तकनीक और नवाचार से परिचित कराने का अवसर देता है। उन्होंने भारतीय भाषाओं और आधुनिक तकनीक के समन्वय को देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
हिंदी को ज्ञान और नवाचार की भाषा बनाने पर जोर
कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में विद्यार्थियों के लिए बहुआयामी प्रतिभा का विकास जरूरी है। भाषा प्रभावी संचार का माध्यम है, जबकि तकनीकी दक्षता रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर खोलती है।
उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान, संवाद और नवाचार की प्रभावी भाषा के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों से विद्यार्थियों ने किया संवाद
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद किया और इंजीनियरिंग, डिजिटलीकरण, रोजगार, स्टार्टअप और नवाचार से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में भाषाई अभिव्यक्ति, रचनात्मकता, उद्यमिता और तकनीकी कौशल के समन्वित विकास को बढ़ावा देना रहा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को बधाई दी तथा भविष्य में भी इस तरह के शैक्षणिक और सांस्कृतिक आयोजनों को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।


































