जनसंवाद, जमशेदपुर। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी के होटल मैनेजमेंट विभाग की ओर से ‘सतत पर्यटन’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘पर्यटन का पुनर्रूपांकन: सतत प्रयास, समृद्ध भविष्य’ रखी गई।
कार्यशाला में होटल और हॉस्पिटैलिटी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ सतत पर्यटन, रोजगार की संभावनाओं और उद्योग की बदलती जरूरतों पर चर्चा की।
‘पर्यटन के साथ सतत विकास भी जरूरी’
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ सतत विकास पर ध्यान देना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उद्योग की वास्तविक चुनौतियों और आधुनिक कार्यप्रणाली के लिए तैयार करना जरूरी है। पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति को संरक्षित करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देना दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
पर्यटन क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के अवसर
कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के कई अवसर उपलब्ध कराता है। उन्होंने सतत पर्यटन को भविष्य की महत्वपूर्ण जरूरत बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई के साथ उद्योग विशेषज्ञों के अनुभवों का भी लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थी उद्योग की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझकर वैश्विक मानकों के अनुरूप अपनी क्षमता विकसित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों ने बताए उद्योग के बदलते ट्रेंड
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में रैडिसन ब्लू के जनरल मैनेजर संदीप सिंह और विशिष्ट वक्ता सेल्स एग्जीक्यूटिव श्वेता कुमारी शामिल हुईं।
संदीप सिंह ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए कहा कि पर्यटन का भविष्य ऐसे मॉडल पर निर्भर करेगा, जिसमें आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो।
उन्होंने विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जुड़ने, ग्राहक-केंद्रित सेवा भावना विकसित करने और व्यावहारिक कौशल को मजबूत करने की सलाह दी।
उद्योग आधारित शिक्षा पर जोर
कार्यशाला में होटल मैनेजमेंट के विद्यार्थियों को पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की मौजूदा जरूरतों से परिचित कराया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि बदलते पर्यटन उद्योग में तकनीकी जानकारी के साथ व्यवहारिक कौशल, बेहतर संचार और ग्राहक सेवा की समझ भी महत्वपूर्ण है।
आयोजन समिति के अनुसार, इस तरह के अकादमिक और उद्योग-उन्मुख कार्यक्रम विद्यार्थियों में शोध, नवाचार और व्यावहारिक समझ विकसित करने में मदद करते हैं।
विश्वविद्यालय के अधिकारी और विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम में कुलाधिपति मदन मोहन सिंह, कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि, कुलसचिव नागेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोजिब अशरफ, अकादमिक सलाहकार प्रो. दिलीप शोम, डीन (प्रशासन) डॉ. राकेश कुमार और डीन (अकादमिक) अभिनव कुमार सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने भविष्य में भी राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक और उद्योग संवाद कार्यक्रमों को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

















