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डिमना बस स्टैंड की जमीन पर कचरा डंपिंग के खिलाफ NGT पहुंचे सौरभ विष्णु, तत्काल रोक लगाने की मांग

By Goutam

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जनसंवाद, जमशेदपुर। डिमना स्थित वसुंधरा स्टेट और आसपास के क्षेत्रों में प्रस्तावित बस स्टैंड की जमीन पर हो रही कचरा डंपिंग का मामला अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक पहुंच गया है। जन विकास मंच के प्रमुख एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु ने इस मामले को लेकर NGT में याचिका दायर करते हुए कचरा डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने और पर्यावरणीय नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की है।

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सौरभ विष्णु ने बताया कि स्थानीय निवासियों की शिकायत मिलने के बाद उन्होंने संबंधित स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि जिस लगभग 13 एकड़ भूमि को भविष्य में बस स्टैंड निर्माण के लिए चिन्हित किया गया है, उसी जगह पर बड़े पैमाने पर कचरा डंप किया जा रहा है। इसके कारण पूरे क्षेत्र में दुर्गंध, गंदगी और प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है।

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उन्होंने कहा कि वसुंधरा स्टेट एवं आसपास के इलाकों में हजारों परिवार निवास करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या मध्यमवर्गीय परिवारों की है। कचरा डंपिंग के कारण लोगों को प्रतिदिन असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र का मुख्य आवागमन मार्ग भी इसी स्थान से होकर गुजरता है, जिससे आने-जाने वाले लोगों को बदबू और गंदगी झेलनी पड़ रही है।

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सौरभ विष्णु ने आरोप लगाया कि मानगो नगर निगम द्वारा बस स्टैंड निर्माण के लिए आरक्षित भूमि का उपयोग कचरा फेंकने के लिए किया जा रहा है। इससे एक ओर जहां शहर की महत्वपूर्ण विकास योजना प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को इस स्थान पर आधुनिक बस स्टैंड बनने की उम्मीद थी, लेकिन वर्तमान में यह क्षेत्र धीरे-धीरे कचरा डंपिंग यार्ड में तब्दील होता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है। जलभराव, दुर्गंध, प्रदूषण और संक्रमण जैसी समस्याएं आसपास के निवासियों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।

NGT में दायर याचिका के माध्यम से सौरभ विष्णु ने मांग की है कि प्रस्तावित बस स्टैंड की जमीन पर कचरा डंपिंग तत्काल बंद कराई जाए, पूरे मामले की पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप जांच कराई जाए तथा क्षेत्र के लोगों को प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी खतरों से राहत दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए चिन्हित भूमि का उपयोग कचरा डंपिंग के लिए करना न केवल जनहित के खिलाफ है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों के भी विपरीत है। इसलिए संबंधित एजेंसियों को इस मामले में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

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