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सोना देवी विश्वविद्यालय में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ पर कार्यक्रम, युवाओं से नवाचार के जरिए राष्ट्र निर्माण की अपील

By Goutam

Published on:

 

सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026
 

जनसंवाद, घाटशिला। सोना देवी विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में सेवा संकल्प अभियान के तत्वावधान में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ को लेकर प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को नवाचार, सामाजिक सेवा और रचनात्मक सोच के माध्यम से समाज की समस्याओं का समाधान खोजने तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।

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कार्यक्रम में एमआरपीएल-ओएनजीसी के स्वतंत्र निदेशक लखन मरांडी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भाजपा झारखंड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय की सहायक कुलसचिव अर्चना सिंह ने किया।

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सेवा की भावना से नवाचार को जोड़ें युवा : लखन मरांडी

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लखन मरांडी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से शुरू हुई यह पहल सेवा की भावना को नवाचार के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने युवाओं से अपनी प्रतिभा और तकनीकी ज्ञान का उपयोग सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए करने की अपील की।

उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के तहत कृषि, जल एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं कल्याण, शिक्षा, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार तथा पर्यावरण एवं सतत विकास जैसे क्षेत्रों में नए विचार प्रस्तुत किए जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसी परियोजनाएं तैयार करने का आह्वान किया, जो आम लोगों के जीवन को सरल और बेहतर बनाने में उपयोगी हों।

युवाओं की भागीदारी से साकार होगा विकसित भारत : डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी

डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की प्रतिभा, मेहनत, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों, चंद्रयान मिशन, स्वदेशी तकनीक और रक्षा प्रणालियों में हो रही प्रगति का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने आर्यभट, नालंदा और तक्षशिला जैसी ज्ञान परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेकर युवा भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और महिला सशक्तिकरण पर भी जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से स्थानीय समस्याओं को पहचानकर छोटे-छोटे प्रयोगों और सामुदायिक सेवा के माध्यम से समाधान विकसित करने की अपील की।

नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से मजबूत होगा राष्ट्र : कुलपति

कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने विद्यार्थियों को रचनात्मक चिंतन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे सामाजिक सेवा, समस्या समाधान और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने समाज की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप विचारों और परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया, ताकि विद्यार्थियों की प्रतिभा से सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।

‘शिक्षा का उद्देश्य समाज और राष्ट्र की सेवा भी’

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि विकसित भारत का सपना साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों को अपनी बौद्धिक क्षमता, रचनात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व का निरंतर विकास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान देना भी है। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, सामाजिक मूल्यों को महत्व देने और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कुलाधिपति ने विद्यार्थियों से ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ में भाग लेकर उपयोगी परियोजनाएं तैयार करने और अपने ज्ञान एवं प्रतिभा के माध्यम से देश की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।

दो करोड़ रुपये के पुरस्कार, 30 अक्टूबर तक आवेदन

कार्यक्रम में प्रतियोगिता के उद्देश्यों और सहभागिता के अवसरों की जानकारी दी गई। आयोजकों के अनुसार, ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ के लिए कुल दो करोड़ रुपये के पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। कॉलेज के विद्यार्थी, व्यक्तिगत प्रतिभागी और विभिन्न टीमें इसमें अपने नवाचारी विचार प्रस्तुत कर सकते हैं।

प्रतिभागी कृषि, जल एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं कल्याण, शिक्षा, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार तथा पर्यावरण एवं सतत विकास जैसे क्षेत्रों में समाजोपयोगी समाधान पेश कर सकते हैं। इच्छुक प्रतिभागियों से 30 अक्टूबर तक प्रतियोगिता में भाग लेने की अपील की गई।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संदेश रहा कि नवाचार का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका लाभ समाज तक पहुंचे और उससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए।

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