जनसंवाद, घाटशिला। सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला के स्वामी विवेकानंद सभागार में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय परिवार को दोनों महापुरुषों के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में योगदान से परिचित कराना तथा उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ परीक्षा नियंत्रक मिथिलेश सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता चौधरी ने वैदिक मंत्रोच्चार किया। इसके बाद महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। मंच संचालन बीटेक सीएसई प्रथम सेमेस्टर की छात्रा नेहा बरनवाल ने किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। सुमन कुमारी ने दोनों महापुरुषों के विचारों पर संबोधन दिया, जबकि अलीशा टुडू ने उनके जीवन एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। सुमित्रा कुमारी ने कविता प्रस्तुत की।
‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ की प्रस्तुति ने बांधा समां
संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता चौधरी ने महात्मा गांधी के प्रिय भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिए” की प्रस्तुति दी। भजन ने सभागार में मौजूद लोगों को भाव-विभोर कर दिया।
डॉ. शिवचन्द्र झा ने सत्य और अहिंसा को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार
राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने कहा कि महात्मा गांधी का सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह का दर्शन आज भी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने स्वच्छता, आत्मनिर्भरता, ग्राम स्वराज, सामाजिक समरसता और मानवता को अपने विचारों का आधार बनाया।
उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन को सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उदाहरण बताया। उनके अनुसार शास्त्री जी का “जय जवान, जय किसान” का संदेश आज भी देश की सुरक्षा और कृषि के महत्व को रेखांकित करता है।
कुलसचिव ने युवाओं से आदर्श अपनाने का किया आह्वान
कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि गांधी जी ने सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के माध्यम से समाज को दिशा दी, जबकि शास्त्री जी ने सादगी और ईमानदारी से आदर्श नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी, स्वच्छता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कुलपति ने जिम्मेदार नागरिक निर्माण को बताया विश्वविद्यालय का दायित्व
कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा कि विश्वविद्यालय का दायित्व केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित करनी चाहिए।
कार्यक्रम के समापन पर परीक्षा नियंत्रक मिथिलेश सिंह ने संबोधन दिया। अंत में विश्वविद्यालय परिवार और विद्यार्थियों ने गांधी एवं शास्त्री के आदर्शों को जीवन में अपनाने तथा राष्ट्र और समाज के विकास में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

















