जनसंवाद, जमशेदपुर। जमशेदपुर के डिमना, एनएच-33, बर्मामाइंस, पटमदा और आदित्यपुर क्षेत्र में सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े भारी वाहनों को लेकर लोगों में लगातार आक्रोश बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना परमिट चलने वाले वाहन, सड़क किनारे खड़े ट्रक और भारी वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग सड़क हादसों का बड़ा कारण बन रही है।
यह भी पढ़ें: शहर में बढ़ते अपराध पर सौरभ विष्णु ने जताई चिंता, SSP से स्पेशल टास्क फोर्स गठन की मांग
हाल के दिनों में बर्मामाइंस क्षेत्र में हुए दो बड़े हादसों और पटमदा क्षेत्र में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के बाद लोगों में डर और नाराजगी बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन की ओर से पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।
इस मुद्दे पर पूर्व लोकसभा प्रत्याशी और जन विकास मंच के प्रमुख सौरभ विष्णु ने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन नहीं होने के कारण दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अवैध पार्किंग, ओवरलोडिंग और बिना परमिट चल रहे भारी वाहन आम लोगों की जान के लिए खतरा बन चुके हैं।
यह भी पढ़ें: मानगो-डिमना में हर 5 मिनट पर कट रही बिजली, सौरभ विष्णु ने DVC और JBVNL पर उठाए सवाल
सौरभ विष्णु ने कहा कि सड़क पर अवैध रूप से खड़े भारी वाहन यदि किसी की मौत का कारण बनते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी केवल वाहन चालक या मालिक की नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन की भी बनती है। उन्होंने कहा कि सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना, अवैध पार्किंग रोकना और ट्रैफिक व्यवस्था नियंत्रित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यदि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती और हादसे लगातार होते रहते हैं, तो इसे प्रशासनिक लापरवाही माना जाना चाहिए।
सौरभ विष्णु ने “Wrongful Death” की कानूनी अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति की मौत प्रशासनिक चूक, खराब ट्रैफिक व्यवस्था या अवैध पार्किंग के कारण होती है, तो पीड़ित परिवार न्यायालय में जाकर मुआवजे की मांग कर सकता है।
उन्होंने कहा कि मुआवजा किसी व्यक्ति की जिंदगी की कीमत नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का कानूनी माध्यम है। उन्होंने सड़क हादसों में मृतकों के परिवारों को न्यूनतम 10 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान लागू करने की मांग की।
सौरभ विष्णु ने कहा कि जब प्रशासन पर आर्थिक और कानूनी जवाबदेही तय होगी, तभी व्यवस्था में सुधार आएगा। उन्होंने पीड़ित परिवारों से न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में समाज के लोगों और बुद्धिजीवियों के सहयोग से एक लोकतांत्रिक न्याय-संविधान तैयार करने की दिशा में पहल की जाएगी।





















