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एमजीएम अस्पताल में अनुपस्थित डॉक्टरों पर सौरभ विष्णु ने उठाए सवाल, 25 हजार रुपये जुर्माना लगाने की मांग

By Goutam

Published on:

 

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जनसंवाद, जमशेदपुर। जन विकास मंच के प्रमुख एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के आईसीयू में ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों की अनुपस्थिति के मामले को गंभीर प्रशासनिक विफलता करार देते हुए अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आईसीयू जैसे अत्यंत संवेदनशील विभाग में डॉक्टरों का अनुपस्थित रहना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि मरीजों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है। 

सौरभ विष्णु ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी अनुमंडल पदाधिकारी अर्नव मिश्रा एवं अपर उपायुक्त संतोष गर्ग के औचक निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों की अनुपस्थिति सामने आ चुकी है। उस समय भी जांच और नोटिस की प्रक्रिया अपनाई गई थी, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के अभाव में ऐसी घटनाएं लगातार दोहराई जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि हाल ही में उपायुक्त राजीव रंजन द्वारा अपर उपायुक्त को एमजीएम अस्पताल का नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। ऐसे में अस्पताल की कार्यप्रणाली, अनुशासन और निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना नोडल पदाधिकारी की भी जिम्मेदारी है। यदि बार-बार निरीक्षण में एक जैसी अनियमितताएं सामने आ रही हैं, तो इसकी समीक्षा कर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

सौरभ विष्णु ने कहा कि केवल शो-कॉज नोटिस जारी कर देने या कागजी कार्रवाई कर देने से व्यवस्था में सुधार नहीं आएगा। जनता को परिणाम चाहिए और सरकारी अस्पतालों में जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि वर्तमान निरीक्षण में अनुपस्थित पाए गए डॉक्टरों के रिकॉर्ड का पिछले निरीक्षण में अनुपस्थित पाए गए डॉक्टरों के रिकॉर्ड से मिलान कराया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि दोनों अवसरों पर एक ही डॉक्टर अनुपस्थित पाए जाते हैं, तो उन पर तत्काल 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाना चाहिए। इससे न केवल दोषियों को दंड मिलेगा, बल्कि अन्य डॉक्टरों और कर्मचारियों के बीच भी अनुशासन एवं जवाबदेही का स्पष्ट संदेश जाएगा।

सौरभ विष्णु ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों का भरोसा बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए इस मामले में कठोर और उदाहरणात्मक कार्रवाई कर यह संदेश दिया जाना चाहिए कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

 

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