जनसंवाद, जमशेदपुर। जन विकास मंच के प्रमुख एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु ने झारखंड सरकार की ओर से संपत्ति की खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पर स्टांप शुल्क के अतिरिक्त 10 प्रतिशत म्यूनिसिपल सेस लगाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर प्रस्तावित सेस वापस लेने की मांग की है।
सौरभ विष्णु ने कहा कि सरकार यदि नगर निकायों की आय बढ़ाने के लिए म्यूनिसिपल सेस लागू करती है तो जमीन, मकान और फ्लैट खरीदना आम लोगों के लिए और महंगा हो जाएगा। इसका सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और जीवनभर की जमा-पूंजी से घर खरीदने वाले परिवारों पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को पहले नगर निगमों की कार्यप्रणाली और बुनियादी सुविधाओं में सुधार करना चाहिए। इसके बाद ही जनता पर किसी नए कर का बोझ डालने पर विचार किया जाना चाहिए।
सौरभ विष्णु ने कहा कि मानगो नगर निगम के गठन के बाद भी क्षेत्र में अपेक्षित विकास कार्य नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों की स्थिति खराब है, नालियां जाम हैं, कई इलाकों में गंदगी की समस्या बनी हुई है और जलनिकासी व अन्य नागरिक सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में विकास के नाम पर अतिरिक्त सेस लगाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब नगर निगम बनने के बाद भी लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तब नया टैक्स लगाने का औचित्य समझ से परे है। महंगाई के दौर में अतिरिक्त कर आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाएगा।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में सौरभ विष्णु ने मांग की है कि प्रस्तावित म्यूनिसिपल सेस को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही नगर निगमों को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार अपने बजट से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराए तथा सड़क, नाली, सफाई, पेयजल और जलनिकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि “पहले विकास, फिर टैक्स” की नीति ही जनहित में होगी।

















