जनसंवाद, जमशेदपुर। श्रीनाथ विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शनिवार को समापन हो गया। 21 से 25 जुलाई 2026 तक आयोजित इस ऑनलाइन कार्यक्रम का विषय “सतत विकास के लिए मैकेनिकल इंजीनियरिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग का प्रभाव” था।
विश्वविद्यालय के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के इस एफडीपी में झारखंड, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के 90 से अधिक शिक्षकों, शोधार्थियों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बढ़ते उपयोग तथा सतत विकास में उनकी भूमिका से परिचित कराना था।
एफडीपी के दौरान वीएनआईटी नागपुर, एनआईटी सुरथकल, एनआईटी जमशेदपुर, एमआईटी मणिपाल, अमृता स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग, सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे तथा श्रीनाथ विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। सत्रों में एआई आधारित प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, मशीन लर्निंग, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, पॉलिमर एवं कंपोजिट मैटेरियल और सतत इंजीनियरिंग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
समापन समारोह की शुरुआत एफडीपी के संयोजक डॉ. कमलेन्द्र विक्रम के संबोधन से हुई। उन्होंने संसाधन व्यक्तियों, प्रतिभागियों, आयोजन समिति और विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सह-संयोजक डॉ. वसीम अकरम, निलय मंडल और चंदन कुमार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में शिक्षकों के लिए निरंतर कौशल विकास आवश्यक है।
समारोह के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) एस. एन. सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग भविष्य की इंजीनियरिंग शिक्षा की आधारशिला बन चुके हैं। उन्होंने शिक्षकों और शोधकर्ताओं से इन तकनीकों को शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया, ताकि विद्यार्थी इंडस्ट्री 4.0 की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो सकें।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों से प्राप्त फीडबैक भी साझा किया गया। अधिकांश प्रतिभागियों ने विशेषज्ञ व्याख्यानों की गुणवत्ता, विषयों की प्रासंगिकता और कार्यक्रम के संचालन की सराहना करते हुए इसे ज्ञानवर्धक, व्यावहारिक और शोध उन्मुख बताया।
सह-संयोजक डॉ. वसीम अकरम ने कहा कि इस एफडीपी ने अकादमिक सहयोग को नई दिशा दी है और प्रतिभागियों को मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एआई एवं मशीन लर्निंग के नवीन अनुप्रयोगों पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया है।
वहीं डीन एडमिनिस्ट्रेशन डॉ. जे. राजेश ने कहा कि एआई और मशीन लर्निंग इंजीनियरिंग शिक्षा एवं औद्योगिक नवाचार का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शिक्षकों की क्षमता वृद्धि, अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप शिक्षा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समापन समारोह में असिस्टेंट डीन (रिसर्च) डॉ. शैलेश शरांगी, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के प्रमुख शशिकांत सिंह, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष अभिषेक कुमार, विश्वविद्यालय के शिक्षक, विशेषज्ञ वक्ता और देशभर से जुड़े प्रतिभागी उपस्थित रहे।
















