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जेआरडी टाटा: दूरदर्शी उद्योगपति से बढ़कर मानवीय नेतृत्व की मिसाल, मूल्यों और नवाचार की विरासत आज भी जीवंत

By Goutam

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जेआरडी टाटा की विरासत

जनसंवाद, जमशेदपुर। टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन जहांगीर रतनजी दादाभाई (जे.आर.डी.) टाटा को देश एक दूरदर्शी उद्योगपति, विमानन क्षेत्र के अग्रदूत और राष्ट्र निर्माता के रूप में याद करता है। लेकिन उनके साथ काम करने वाले लोग उन्हें उनकी उपलब्धियों से कहीं अधिक उनकी सादगी, विनम्रता और मानवीय नेतृत्व के लिए याद करते हैं।

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जे.आर.डी. टाटा का मानना था कि नेतृत्व अधिकार से नहीं, बल्कि आचरण और विश्वास से स्थापित होता है। वे हर व्यक्ति के साथ समान सम्मान का व्यवहार करते थे और निर्णय लेने से पहले सभी की बात सुनने में विश्वास रखते थे। उनके व्यक्तित्व से जुड़ी कई घटनाएं आज भी लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।

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बताया जाता है कि मुंबई के स्टील हाउस में रहने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों से जे.आर.डी. टाटा का आत्मीय संबंध था। वे कई बार स्वयं कार चलाकर लोगों को उनके घर छोड़ने जाते थे और परिवारों के साथ समय बिताते थे। वहीं, बॉम्बे हाउस की एक घटना में उन्होंने उस लिफ्ट ऑपरेटर का समर्थन किया, जिसने नियमों का पालन करते हुए उन्हें भी कतार तोड़कर आगे नहीं जाने दिया। बाद में कर्मचारी के तबादले की जानकारी मिलने पर जे.आर.डी. ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नियमों का पालन करने वाले कर्मचारी को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

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अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सफलता का श्रेय हमेशा अपनी टीम को दिया। उनका मानना था कि किसी भी संस्था की वास्तविक ताकत उसके लोग होते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने कर्मचारियों के कल्याण, प्रगतिशील मानव संसाधन नीतियों और प्रबंधन एवं कर्मचारियों के बीच संवाद की संस्कृति को बढ़ावा दिया। उनकी पहल ने टाटा स्टील में ‘पीपल-फर्स्ट’ कार्य संस्कृति को मजबूत आधार प्रदान किया।

जे.आर.डी. टाटा ने व्यवसाय को केवल लाभ कमाने का माध्यम नहीं माना, बल्कि नैतिकता, कर्मचारी कल्याण और राष्ट्र निर्माण को उसकी मूल भावना बताया। उनके नेतृत्व में स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और सामाजिक विकास से जुड़े कई प्रयासों ने जमशेदपुर को एक आदर्श औद्योगिक शहर के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी नैतिक नेतृत्व की सोच आज भी टाटा स्टील के एथिक्स मंथ जैसे आयोजनों की प्रेरणा बनी हुई है।

इनोवेशन भी उनके नेतृत्व की प्रमुख पहचान रहा। चाहे टाटा स्टील का आधुनिकीकरण हो, भारत में नागरिक उड्डयन की नींव रखने की पहल हो या युवा नेतृत्व को नए विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना, उन्होंने हमेशा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर कार्य किया।

टाटा स्टील का कहना है कि जे.आर.डी. टाटा के निधन के तीन दशक बाद भी उनके मूल्य संगठन की कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं। नैतिकता, कर्मचारियों के समग्र कल्याण, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग और 2045 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में कंपनी की प्रतिबद्धता उनकी दूरदृष्टि को आगे बढ़ा रही है।

कंपनी के अनुसार, ‘वन टाटा स्टील’ के रूप में संगठन जमशेदजी टाटा और जे.आर.डी. टाटा के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए समाज, उद्योग और राष्ट्र के विकास के लिए जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और उद्देश्यपूर्ण सोच के साथ कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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