जनसंवाद, घाटशिला। सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार, संवर्धन और संरक्षण के उद्देश्य से हिन्दी पखवाड़ा-2026 का शुभारंभ किया गया। 15 से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले हिन्दी पखवाड़े के तहत विश्वविद्यालय में साहित्यिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। मंगलवार को स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
दीप प्रज्ज्वलन और ‘हिन्दी—एक राष्ट्र वंदना’ से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पार्चन से हुई। इसके बाद ‘हिन्दी—एक राष्ट्र वंदना’ प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में हिन्दी भाषण, दोहा पाठ, हिन्दी गीत, कविता पाठ तथा हिन्दी भाषा के उद्भव और विकास से जुड़े विषयों पर वक्ताओं एवं विद्यार्थियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का संचालन कृषि विज्ञान विभाग के सहायक अध्यापक पतत्रि माली ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए हिन्दी की व्यापकता और भारतीय जनमानस से उसके गहरे संबंध को रेखांकित किया।
हिन्दी के व्यवहारिक प्रयोग पर कुलसचिव ने दिया जोर
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि हिन्दी का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब इसे व्यवहार और दैनिक कार्यों का हिस्सा बनाया जाए। हिन्दी के प्रति सम्मान केवल हिन्दी दिवस या हिन्दी पखवाड़े तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे वर्ष हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से शिक्षण, संवाद, कार्यालयीन कार्य और विभिन्न गतिविधियों में हिन्दी के अधिकाधिक व्यवहारिक प्रयोग को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में भाषा के प्रति गौरव की भावना विकसित करना शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
हिन्दी को व्यवहार की भाषा बनाने का आह्वान
कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हिन्दी को समृद्ध बनाने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि हम स्वयं इसका अधिक से अधिक प्रयोग करें और आने वाली पीढ़ी को भी इसके लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी समाज की पहचान और उसकी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार होती है। हिन्दी के विकास के साथ भारतीय साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना का भी विस्तार होता है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से हिन्दी का प्रयोग शिक्षा, अनुसंधान, संवाद और रचनात्मक गतिविधियों में बढ़ाने का आह्वान किया।
कुलपति ने कहा कि आज का युवा तकनीक और डिजिटल माध्यमों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में हिन्दी को डिजिटल तकनीक, इंटरनेट, सोशल मीडिया तथा आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ना समय की आवश्यकता है। हिन्दी को आधुनिक ज्ञान और तकनीकी क्षेत्र की प्रभावशाली भाषा बनाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
हिन्दी को वैश्विक भाषा बनाने पर जोर
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने विद्यार्थियों को हिन्दी के प्रति प्रेरित करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत “हिन्दी है वतन है, हिन्दुस्तान हमारा” जैसे संदेश से की। उन्होंने कहा कि हिन्दी भारत की विविधताओं के बीच संवाद और संपर्क का एक सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि भारत की विशाल भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता के बावजूद हिन्दी देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक हिन्दी का व्यापक प्रभाव दिखाई देता है।
कुलाधिपति ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी विविधताओं का सम्मान करते हुए हिन्दी के साथ-साथ अन्य भारतीय एवं विदेशी भाषाओं का भी ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। बहुभाषिकता से व्यक्ति के ज्ञान, संवाद क्षमता और दृष्टिकोण का विस्तार होता है।
अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का किया उल्लेख
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर हिन्दी में दिए गए संबोधन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर हिन्दी में भारत की बात रखकर भाषा की क्षमता और गरिमा को वैश्विक स्तर पर सामने रखा।
उन्होंने कहा कि हिन्दी को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने के लिए साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और समाज के विभिन्न वर्गों को अपनी भूमिका निभानी होगी। हिन्दी का वैश्विक विस्तार भारतीय संस्कृति, विचार, साहित्य और ज्ञान परंपरा के विस्तार से भी जुड़ा है।
‘विकास, समृद्धि और उन्नति’ पर दिया जोर
कुलाधिपति ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान, कौशल, व्यक्तित्व और भाषा क्षमता को लगातार विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के विकास में भाषा और संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका है। अपनी भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करते हुए देश की प्रगति में योगदान देना आवश्यक है।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इतिहास विभाग की छात्रा मानवी हेमराम ने संत कबीर की वाणी प्रस्तुत की। छात्र चुरानी ने हिन्दी भाषा की वर्तमान प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे और डिजिटल युग में हिन्दी के बढ़ते प्रयोग की चर्चा की।
संगीत विभाग के छात्र मनीष दास ने संगीत प्रस्तुति दी। वहीं गणित विभाग के विभागाध्यक्ष कृष्णेंदु दत्ता ने हिन्दी फिल्म के लोकप्रिय गीत की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भरा। छात्रा सानिया बसा ने हिन्दी भाषा की आवश्यकता और उपयोगिता पर विचार रखते हुए इसे केवल परीक्षा का विषय न मानकर जीवन और व्यवहार की भाषा के रूप में अपनाने की बात कही।
हिन्दी पखवाड़े में होंगे विविध कार्यक्रम
हिन्दी पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत निबंध लेखन, भाषण, कविता पाठ, वाद-विवाद, सुलेख, प्रश्नोत्तरी तथा विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिन्दी के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उनकी रचनात्मकता और अभिव्यक्ति क्षमता का विकास करना है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कंचन सिन्हा ने अतिथियों, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान, गौरव और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के संकल्प के साथ हुआ।

















