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आरआईटी : जागृति मैदान पर बुलडोज़र नहीं, बच्चों के सपनों पर वार है, आदित्यपुर में भड़का जनविद्रोह, पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के समर्थन से आंदोलन हुआ उग्र, नगर निगम के खिलाफ आर-पार की निर्णायक जंग…

By Balram Panda

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आरआईटी / Balram Panda : युवा पीढ़ी के सपनों और भविष्य की नींव माने जाने वाले जागृति मैदान को लेकर आरआईटी में जनाक्रोश चरम पर पहुंच गया है. रविवार को आदित्यपुर क्रिकेट अकादमी के बैनर तले जागृति मैदान में नगर निगम की कार्यशैली के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया. इस प्रदर्शन में वर्तमान एवं पूर्व पार्षदों के साथ बड़ी संख्या में अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता और बच्चे शामिल हुए.

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अकादमी के अध्यक्ष मनमोहन सिंह राजपूत और सचिव अनिल कुमार सिंह (एडवोकेट) ने स्पष्ट कहा कि यह मैदान सिर्फ खेल का स्थान नहीं, बल्कि सैकड़ों बच्चों के सपनों की प्रयोगशाला है. इसे नुकसान पहुंचाना सीधे तौर पर आने वाली पीढ़ी को अंधकार में धकेलने जैसा है.

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इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संतोष सिंह, पूर्व पार्षद रंजन सिंह, वार्ड 29 की पार्षद अर्चना सिंह, वार्ड 27 की पार्षद रिंकी कुमारी, भाजपा युवा नेता सतीश शर्मा, युवा जनशक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय झा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने नगर निगम की नीतियों पर तीखा सवाल उठाया.

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प्रदर्शन में वार्ड 35 की पार्षद संगीता सामड़, वार्ड 11 की पार्षद मंजू सिंह, वार्ड 12 के पार्षद मोतीलाल बिसुई, वार्ड 24 के पार्षद रामप्रसाद मुखी, वार्ड 25 की पार्षद उत्तरा प्रधान, वार्ड 14 की पार्षद सुनीता बेरा समेत कई जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही. वहीं अभिभावकों में योगेंद्र ठाकुर, धनंजय झा, सुमन झा, विदानंद झा, अरविंद सिंह, केश्वर मिश्रा सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे.

अकादमी के कोच ने कहा कि जागृति मैदान क्षेत्र का एकमात्र ऐसा मैदान है, जहां बच्चे खेल के माध्यम से अपने भविष्य को आकार देते हैं. यदि इस मैदान को ही खत्म कर दिया गया, तो यह न केवल खेल बल्कि पूरे समाज के भविष्य पर गहरा आघात होगा. उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर स्थानीय विधायक, पार्षदों, बुजुर्गों और प्रशासनिक स्तर पर भी समर्थन मिल रहा है.

अकादमी अध्यक्ष मनमोहन सिंह राजपूत ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि “बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यदि आदित्यपुर नगर निगम अपनी मनमानी से बाज नहीं आया, तो व्यापक और उग्र आंदोलन किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि इस गंभीर मुद्दे की जानकारी झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व स्थानीय विधायक चंपई सोरेन को भी दे दी गई है. उन्होंने इस मुद्दे को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए आश्वासन दिया है कि “झारखंड की युवा पीढ़ी के सपनों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. खेल और शिक्षा के माध्यम से बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है, उनके इस हस्तक्षेप से स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है और आंदोलन को एक मजबूत नैतिक समर्थन मिला है.

इधर, जागृति मैदान को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. स्थानीय लोगों का कहना है कि आखिर किस मंशा से इस मैदान को प्रभावित किया जा रहा है? जनता यह पूछ रही है कि क्या इसी दिन के लिए उन्होंने अपने जनप्रतिनिधियों को चुना था, ताकि बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाए?

फिलहाल, जागृति मैदान का मुद्दा अब जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है. यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में यह विरोध और भी तीव्र होने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं.

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