जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर)। दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में आयोजित 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन के दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के नेतृत्व में विचार-विमर्श बैठक हुई। बैठक में विभिन्न राज्यों से पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। खरसावां विधायक दशरथ गागराई भी इस बैठक में शामिल हुए।
69वां राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन केपटाउन में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का मुख्य विषय बदलती वैश्विक व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय कानून और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने से जुड़ा है। सम्मेलन में विभिन्न देशों के सांसद, विधानसभा सदस्य और संसदीय अधिकारी लोकतांत्रिक संस्थाओं, सुशासन और संसदीय सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा कर रहे हैं।
लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने पर जोर
बैठक में संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने, जनहित के मुद्दों को सदनों में प्रभावी ढंग से उठाने और राष्ट्रमंडल देशों के बीच संसदीय सहयोग बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सम्मेलन के आधिकारिक कार्यक्रम में भी अंतर-संसदीय संवाद, समावेशी विकास, लोकतांत्रिक संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई है।
राज्यसभा सचिवालय के अनुसार, हरिवंश भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं और सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में भाग ले रहे हैं। 16 सितंबर को उन्होंने समावेशी एवं निष्पक्ष व्यापार तथा असमानता और अविकास से जुड़े विषय पर मुख्य सम्मेलन सत्र में भी हिस्सा लिया।
दशरथ गागराई ने झारखंड से जुड़े मुद्दे रखे
बैठक में खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने झारखंड की सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक परिस्थितियों से जुड़े विषयों को सामने रखा। उन्होंने ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आदिवासी समुदायों के उत्थान से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संसदीय सम्मेलनों में विभिन्न देशों की कार्यप्रणाली और अनुभवों को समझने का अवसर मिलता है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास और जनसेवा से जुड़े कार्यों के लिए नए अनुभव प्राप्त किए जा सकते हैं।
बदलते वैश्विक परिदृश्य में संसदीय भूमिका पर चर्चा
विचार-विमर्श के दौरान लोकतंत्र, पारदर्शिता, जवाबदेही, सतत विकास, जलवायु परिवर्तन, युवा भागीदारी, महिला सशक्तिकरण और तकनीक के बढ़ते उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सम्मेलन के आधिकारिक कार्यक्रम में भी लोकतांत्रिक शासन, अंतरराष्ट्रीय कानून, समावेशी विकास और संसदीय संस्थाओं को मजबूत करने से जुड़े कई सत्र निर्धारित किए गए हैं।
दशरथ गागराई ने कहा कि राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भागीदारी से विभिन्न देशों के जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद और उनके संसदीय अनुभवों को समझने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों का उपयोग भविष्य में जनसेवा और विकास से जुड़े कार्यों में किया जा सकता है।

















