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नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में “माइंडटेक” राष्ट्रीय कार्यशाला, मानसिक स्वास्थ्य और तकनीक पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

By Goutam

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जनसंवाद, जमशेदपुर। नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल द्वारा नेशनल एसोसिएशन ऑफ मेंटल हेल्थ एंड अलाइड हेल्थ फाउंडेशन के सहयोग से दो दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय कार्यशाला “माइंडटेक: रीइमेजिनिंग मेंटल हेल्थ थ्रू रिसर्च, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी” का आयोजन किया गया।

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इस कार्यशाला का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, शोध और नवाचार की भूमिका पर चर्चा करना था। कार्यक्रम में देशभर से शोधार्थियों, शिक्षकों, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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कार्यशाला के दौरान डिजिटल मेंटल हेल्थ इंटरवेंशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा आधारित मानसिक स्वास्थ्य शोध, क्लिनिकल प्रैक्टिस में नवाचार, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े नैतिक पहलू और भविष्य की संभावनाओं जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज, पुणे की असिस्टेंट प्रोफेसर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रेरणा दीक्षित तथा आईआईआईटी रांची के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जयदीप पति उपस्थित रहे। दोनों विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में तकनीक और शोध के बढ़ते महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

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कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि, कुलसचिव नागेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोईज अशरफ, आईक्यूएसी निदेशक डॉ. श्रद्धा वर्मा, डीन रिसर्च एंड इनोवेशन सेल डॉ. ईशिता घोष, डीन एकेडमिक अभिनव कुमार और डीन एडमिनिस्ट्रेशन डॉ. राकेश कुमार सहित कई संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर वैश्विक विषय बन चुका है और युवाओं के बीच इस विषय पर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों के समग्र विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है।

वहीं कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने कहा कि तकनीक और शोध के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में AI और डेटा आधारित रिसर्च की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

मुख्य वक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल प्रेरणा दीक्षित ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

डॉ. जयदीप पति ने अपने व्याख्यान में कहा कि डेटा आधारित शोध और AI तकनीक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने शोधार्थियों को अंतर्विषयक शोध को बढ़ावा देने की सलाह दी।

दो दिवसीय इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया।

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