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सरहुल महापर्व में सांसद कालीचरण मुंडा व विधायक दशरथ गागराई शामिल, पारंपरिक वेशभूषा में किया सामूहिक नृत्य

By Goutam

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जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर)। झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से होती है, और इन्हीं परंपराओं में प्रमुख पर्व सरहुल पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। कुचाई प्रखंड के दलभंगा, जिलिंगदा और मोसोडीह गांवों में आयोजित सरहुल महोत्सव में खूंटी के सांसद कालीचरण मुंडा और खरसावां विधायक दशरथ गागराई अपनी पत्नी बासंती गागराई के साथ शामिल हुए।

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इस दौरान दोनों जनप्रतिनिधि पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए और मांदर, ढोल-नगाड़े की थाप पर ग्रामीणों के साथ सामूहिक नृत्य कर उत्सव में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष और बच्चे शामिल हुए।

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सांसद कालीचरण मुंडा ने कहा कि सरहुल पर्व मनुष्य और प्रकृति के बीच अटूट संबंध का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन की उत्पत्ति प्रकृति से होती है और अंततः उसी में विलीन हो जाती है।

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वहीं विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण ही सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की कुंजी है। इस परंपरा के माध्यम से हमें प्रकृति के साथ अपने संबंध को और मजबूत करने की प्रेरणा मिलती है।

कार्यक्रम के दौरान पूजा-अर्चना के साथ पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। सभी ने मिलकर प्रकृति की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की।

मौके पर समाजसेवी बासंती गागराई, सांसद प्रतिनिधि मानसिंह मुंडा, छोटराय किस्कू, कोंदो कुंभकार, विधायक प्रतिनिधि धमेंद्र सिंह मुंडा, सचिव मुन्ना सोय, मुखिया करम सिंह मुंडा, राम सोय, मंगल सिंह मुंडा, रेखामनी उरांव, राहुल सोय, दशरथ उरांव, भुवनेश्वर मुंडा, अजीत मुंडा, राम चंद्र मुंडा समेत कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।

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