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सोना देवी विश्वविद्यालय में नेशनल साइंस डे: ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर’ थीम पर छात्रों ने पेश किए नवाचार मॉडल

By Goutam

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जनसंवाद, जमशेदपुर/घाटशिला। सोना देवी विश्वविद्यालय के विवेकानंद ऑडिटोरियम में नेशनल साइंस डे उत्साहपूर्वक मनाया गया। ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ फार्मेसी और स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस के विद्यार्थियों ने नवाचार आधारित मॉडल प्रस्तुत किए।

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कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने ‘मॉडल तालाब’ की परिकल्पना प्रस्तुत की, जिसमें जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और सतत विकास की वैज्ञानिक अवधारणाओं को प्रदर्शित किया गया। एग्रीकल्चरल साइंस की छात्रा कृतिका ने ‘विज्ञान जल वाटिका’ मॉडल के माध्यम से वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, सिंचाई व्यवस्था और जलीय जैव विविधता का प्रदर्शन किया।

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स्कूल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के जरिए वाटर फिल्ट्रेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली समझाई और बताया कि रोबोटिक तकनीक से तालाब की सफाई कैसे की जा सकती है।

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बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा सुप्रीति घोष ने बताया कि एल्गी कल्टीवेशन और एक्वाकल्चर के जरिए ग्रीन टेक्नोलॉजी और बायो फर्टिलाइजर उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। वहीं स्कूल ऑफ फार्मेसी के विद्यार्थियों ने माइक्रो एल्गी से हेल्थ प्रोडक्ट विकसित करने की संभावनाओं पर प्रस्तुति दी।

कुलसचिव डॉ. नित नयना ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच अपनाने और नवाचार की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

कुलपति डॉ. ब्रज मोहन पत पिंगुआ ने कहा कि वैज्ञानिक खोजों के कारण औद्योगिक और खनन दुर्घटनाओं में कमी आई है। उन्होंने विद्यार्थियों को एयर क्वालिटी इंडेक्स मापने हेतु सेंसर विकसित करने का सुझाव दिया तथा इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ योजनाबद्ध कार्य करना आवश्यक है।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और नवाचार ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसे शोध एवं नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

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