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सोना देवी विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों का BHU में जलवा: अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में शोध व्याख्यान से बटोरी सराहना

By Goutam

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जनसंवाद, जमशेदपुर सोना देवी यूनिवर्सिटी (Sona Devi University) के दो प्रख्यात प्राध्यापकों ने (बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (Banaras Hindu University) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में अपने शोधपरक व्याख्यान प्रस्तुत कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया।

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मानविकी अध्ययन विभाग, IIT BHU एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 14 और 15 मार्च 2026 को “भारत में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास” विषय पर द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें देश-विदेश के विद्वानों और शोधार्थियों ने भाग लिया।

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इस अवसर पर सोना देवी विश्वविद्यालय के डॉ. शिवचन्द्र झा (राजनीति विज्ञान विभाग) और डॉ. प्रियंजना बनर्जी (बंगला विभाग) ने अपने शोध आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किए, जो सेमिनार का प्रमुख आकर्षण रहे।

डॉ. शिवचन्द्र झा ने “समानांतर राजनीतिक व्यवस्थाएँ: पंचायती राज और मांझी-परगना प्रणाली के बीच संबंध” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत जैसे विविध समाज में आधुनिक लोकतांत्रिक संस्थाओं और पारंपरिक जनजातीय व्यवस्थाओं का सह-अस्तित्व एक महत्वपूर्ण वास्तविकता है। उन्होंने बताया कि सीमांत क्षेत्रों में इन दोनों व्यवस्थाओं के बीच कभी संघर्ष तो कभी समन्वय देखने को मिलता है, जो स्थानीय शासन व्यवस्था को प्रभावित करता है। उन्होंने दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

वहीं डॉ. प्रियंजना बनर्जी ने “गंगा का प्रवाह: बंगाली संस्कृति में जल संरक्षण की स्वदेशी दृष्टि” विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने नदिया जिले के उदाहरण से बताया कि स्थानीय परंपराएं जल संरक्षण की प्रभावी प्रणाली के रूप में कार्य करती हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास की दौड़ में पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों की अनदेखी पर्यावरणीय संकट को जन्म देती है। इसलिए सतत विकास के लिए लोकज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण आवश्यक है।

दोनों प्राध्यापकों के व्याख्यान को सेमिनार में व्यापक सराहना मिली और यह कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बन गया।

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