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शिक्षक दिवस पर सोना देवी विश्वविद्यालय में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम, गुरु-शिष्य परंपरा और व्यक्तित्व निर्माण का दिया संदेश

By Goutam

Published on:

 

सोना देवी विश्वविद्यालय शिक्षक दिवस
 

जनसंवाद, घाटशिला। शिक्षक दिवस के अवसर पर सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला के स्वामी विवेकानंद सभागार में छात्र-छात्राओं की ओर से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को रेखांकित करना रहा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह, कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा, कुलसचिव डॉ. नीत नयना, शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

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दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि से कार्यक्रम की शुरुआत

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कार्यक्रम का संचालन छात्र अमन कुमार ने किया। दीप प्रज्वलन के बाद भारत के महान शिक्षाविद्, दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान उनके शिक्षा दर्शन और राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया गया।

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गुरु वंदना से शुरू हुई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत छात्राओं मानवी, प्रियंका और श्वेता की गुरु वंदना से हुई। भावपूर्ण प्रस्तुति ने सभागार में श्रद्धा और सम्मान का माहौल बना दिया। इसके बाद फार्मेसी विभाग की छात्रा दीपा ने विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षक की भूमिका पर अपने विचार रखे।

छात्रा माही करवा ने शिक्षक सम्मान में गीत प्रस्तुत किया। रिया कुमारी और मनीषा महंती के नृत्य ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। संगीत विभाग के छात्र मनीष दास ने गायन प्रस्तुति से कार्यक्रम को संगीतमय बना दिया।

डॉ. राधाकृष्णन के जीवन और योगदान को किया याद

छात्राओं ने सामूहिक रूप से डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व पर संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से विद्यार्थियों ने उनके शिक्षा दर्शन और राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया।

इसके अलावा रितिक और माही करवा ने नृत्य प्रस्तुत किया। फार्मेसी विभाग की छात्रा बालेश्वर मंडी ने हास्यपूर्ण अंदाज से दर्शकों का मनोरंजन किया।

नाट्य प्रस्तुति में दिखा गुरु-शिष्य का आत्मीय संबंध

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण गुरु-शिष्य संबंध पर आधारित नाट्य प्रस्तुति रही। विद्यार्थियों ने नाटक के माध्यम से शिक्षक और छात्र के बीच विश्वास, मार्गदर्शन, अनुशासन, स्नेह और आत्मीयता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रस्तुति ने शिक्षा के उद्देश्य और शिक्षक की भूमिका पर विचार करने का संदेश दिया।

शिक्षकों को बताया मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत

कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उनके मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी होते हैं। व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षकों के अनुभव और मार्गदर्शन का लाभ उठाकर अपने भविष्य को बेहतर बनाने का आह्वान किया।

शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण भी जरूरी : कुलपति

कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या डिग्री हासिल करना नहीं है। विद्यार्थियों के चरित्र, व्यक्तित्व, विचार और नेतृत्व क्षमता का निर्माण भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि बदलते समय और नई चुनौतियों के अनुरूप शिक्षण पद्धति में निरंतर विकास जरूरी है। विद्यार्थियों को अनुशासन, मेहनत, नैतिकता और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

सफलता और असफलता दोनों से सीखने की दी सीख

कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज के व्यापक हित में कार्य करना होना चाहिए। विश्वविद्यालय ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ की भावना के अनुरूप विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर लगातार प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सफलता मिलने पर इतराना नहीं चाहिए और असफलता मिलने पर निराश भी नहीं होना चाहिए। गंभीरता, धैर्य, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता के साथ उनके चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण भी महत्वपूर्ण है।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान विभाग की छात्रा लक्ष्मी मुर्मू ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग के लिए कुलाधिपति, कुलपति, कुलसचिव, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार जताया।

शिक्षक दिवस समारोह में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों के प्रति सम्मान के साथ गुरु-शिष्य संबंध, अनुशासन, संस्कार, चरित्र निर्माण और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया। उत्साह और सम्मान के माहौल में कार्यक्रम का समापन हुआ।

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