जनसंवाद, जमशेदपुर। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोल्हान प्रमंडल प्रवक्ता जम्मी भास्कर ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति मतदाता होता है और किसी भी परिस्थिति में किसी वैध मतदाता को उसके संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
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जम्मी भास्कर ने कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में बड़ी संख्या में मध्यम वर्ग, दलित, आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, प्रवासी मजदूर, महिलाएं, बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर लोग निवास करते हैं। इनमें से कई लोगों के पास दशकों पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी स्थिति में दस्तावेजी जटिलताओं के आधार पर मतदाताओं के नाम हटाना लोकतंत्र की भावना के विपरीत होगा।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। झारखंड में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रहे।
कांग्रेस पार्टी को आशंका है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर विपक्षी विचारधारा से जुड़े या इंडिया गठबंधन समर्थक मतदाताओं को दस्तावेजी प्रक्रियाओं में उलझाने का प्रयास किया जा सकता है। इसी कारण कांग्रेस पार्टी बूथ स्तर से लेकर राज्य स्तर तक पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेगी।
जम्मी भास्कर ने कांग्रेस पार्टी के सभी बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) से अपील की कि वे अपने-अपने मतदान केंद्रों पर सतर्क रहें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी वैध मतदाता का नाम वोटर सूची से न कटे।
उन्होंने कहा कि झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू, सह-प्रभारी सुरीविला प्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार निगरानी कर रही है।
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उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर पक्षपात, भेदभाव या वैध मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया गया, तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर निर्वाचन आयोग तक संघर्ष करेगी और जरूरत पड़ने पर राज्यव्यापी आंदोलन भी चलाया जाएगा।
जम्मी भास्कर ने निर्वाचन आयोग से मांग की कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और जनहितकारी होनी चाहिए। किसी भी वैध मतदाता का नाम केवल तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजों की कमी या प्रशासनिक लापरवाही के आधार पर नहीं हटाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उन्हें अनावश्यक दस्तावेजी जटिलताओं में उलझाना। लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहे।


















