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विरोध से सहयोग तक: गांधी घाट बाल दफन स्थल के विकास के लिए साथ आए सौरभ विष्णु और टाटा स्टील

By Goutam

Published on:

 

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जनसंवाद, जमशेदपुर। जनहित के मुद्दों पर मुखर रहने वाले जन विकास मंच के प्रमुख एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु एक बार फिर चर्चा में हैं। टाटा स्टील, यूसीआईएल और रेलवे जैसे बड़े संस्थानों के खिलाफ विभिन्न जनसरोकारों के मुद्दों पर आवाज उठाने वाले सौरभ विष्णु ने इस बार विरोध के बजाय समाधान और सहयोग का रास्ता चुना है।

गांधी घाट के समीप स्थित छोटे बच्चों के दफन स्थल की बदहाल स्थिति को लेकर लंबे समय से प्रयासरत सौरभ विष्णु के आग्रह पर टाटा स्टील कॉरपोरेट कार्यालय और टाटा फाउंडेशन के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने वहां की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया और स्थानीय समस्याओं को गंभीरता से सुना।

बताया गया कि गांधी घाट के पास स्थित यह स्थल वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां अपने बच्चों को अंतिम विदाई देने वाले परिवारों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इस कारण स्थानीय स्तर पर लंबे समय से इसके विकास और सौंदर्यीकरण की मांग उठती रही है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संकेत दिया कि टाटा स्टील की ओर से इस स्थल के विकास की दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी। इससे इसे एक सम्मानजनक, स्वच्छ और व्यवस्थित स्वरूप देने की संभावना बढ़ गई है।

इस मौके पर सौरभ विष्णु ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी संस्था या कॉरपोरेट के गलत कार्यों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध होना चाहिए, लेकिन जहां जनहित के कार्य किए जा रहे हों वहां सहयोग भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने कहा, “मेरा समर्थन किसी संस्था विशेष के लिए नहीं, बल्कि हमेशा जनता और जनहित के लिए है। जहां गलत होगा, वहां विरोध होगा और जहां समाज के हित में कार्य होगा, वहां उसका स्वागत किया जाएगा। गांधी घाट स्थित बाल दफन स्थल का विकास केवल एक स्थान के सौंदर्यीकरण का मामला नहीं है, बल्कि उन परिवारों की भावनाओं और स्मृतियों के सम्मान का विषय है, जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को यहां अंतिम विदाई दी है।”

सौरभ विष्णु ने उम्मीद जताई कि भविष्य में यह स्थल श्रद्धा, शांति और सम्मान का प्रतीक बनेगा तथा शहरवासियों के लिए एक संवेदनशील और गरिमामय स्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।

स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि लंबे समय से उपेक्षित इस स्थल को जल्द ही नया स्वरूप मिलेगा और यहां आवश्यक बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

 

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