जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर)। कुचाई प्रखंड के बिजार गांव स्थित टोला चोपदडीह में फागु सिंह मुंडा के आवास पर करम महोत्सव पूरे श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। करम पर्व को लेकर सुबह से ही गांव में उत्सव का माहौल रहा। ग्रामीणों ने विधि-विधान से करम देवता की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
करम महोत्सव में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, युवक-युवतियां और बच्चे शामिल हुए। आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे और पारंपरिक पूजा में हिस्सा लिया।
विधि-विधान से हुई करम देवता की पूजा
करम पूजा के लिए पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए करम डाली स्थापित की गई। पूजा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पाहन और गांव के बुजुर्गों की मौजूदगी में करम देवता की पूजा-अर्चना संपन्न हुई।
श्रद्धालुओं ने फल, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर अच्छी फसल, परिवार की उन्नति और गांव की सुख-शांति की कामना की।
मांदर की थाप पर रातभर हुआ पारंपरिक नृत्य
पूजा-अर्चना के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। रात होते ही मांदर, नगाड़ा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। महिला और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में करम गीतों पर नृत्य करते नजर आए।
युवाओं के साथ बुजुर्गों ने भी सामूहिक नृत्य में हिस्सा लिया। रातभर चले गीत और नृत्य के कार्यक्रम ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया और पारंपरिक संस्कृति की झलक देखने को मिली।
संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा है करम पर्व
फागु सिंह मुंडा ने कहा कि करम पर्व आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, सामाजिक एकता और सामुदायिक सौहार्द का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि करम महोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया।
आसपास के गांवों से भी पहुंचे लोग
फागु सिंह मुंडा और उनके परिवार के सदस्यों ने महोत्सव में शामिल श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का स्वागत किया। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग करम पूजा में शामिल हुए। आयोजन के दौरान पारंपरिक मर्यादाओं और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि मानसिंह मुंडा, मुखिया करम सिंह मुंडा, फागु सिंह मुंडा, हीरालाल सरदार, रबी मुंडा, संतोषी मुंडा, मुंगली मुंडा, हीरा मुंडा, पार्वती मुंडा समेत अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

















