जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर)। सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड अंतर्गत दलभंगा में वाकास्ट मुंडारी खुंटकट्टी रक्षा एवं विकास समिति, 39 मौजा दलभंगा की ओर से मुंडारी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को लेकर एक दिवसीय विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और भाषा के संरक्षण, संवर्धन तथा संवैधानिक मान्यता के लिए सामूहिक प्रयास करने पर जोर दिया।
भाषा और आदिवासी पहचान के संरक्षण पर चर्चा
गोष्ठी में मुंडारी साहित्य परिषद रांची, भारत मुंडा समाज, रुमबुल, मुंडा महासभा खूंटी, अखिल भारतीय सरना समाज खूंटी, सरना संगोम समिति खूंटी और झारखंड उलगुलान संघ सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
वक्ताओं ने कहा कि मुंडारी भाषा आदिवासी समाज की पहचान, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें समाज का इतिहास, रीति-रिवाज, लोकगीत, लोककथाएं और पारंपरिक ज्ञान समाहित हैं। इसलिए भाषा को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
घर-परिवार में मुंडारी भाषा के इस्तेमाल पर जोर
विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि मुंडारी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। इसके लिए समाज को एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठानी होगी।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक मान्यता की मांग के साथ भाषा को दैनिक जीवन में बढ़ावा देना भी जरूरी है। घरों में बच्चों से मुंडारी भाषा में बातचीत करने, लोकगीतों और लोककथाओं को संरक्षित करने तथा भाषा में साहित्य और शैक्षणिक सामग्री तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
विधायक और सांसद को सौंपा जाएगा मांग पत्र
गोष्ठी में निर्णय लिया गया कि मुंडारी भाषा बोलने वाले क्षेत्रों में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही जिले के स्थानीय विधायक और सांसद से मांग पत्र की अनुशंसा कराने की पहल की जाएगी।
अगले महीने रांची में एक बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। इसमें मुंडारी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
कई सामाजिक प्रतिनिधि हुए शामिल
कार्यक्रम में मान सिंह मुंडा, लखीराम मुंडा, गुरुवा मुंडा, रामचंद्र मुंडा, भुवनेश्वर सिंह मुंडा, मुखिया करम सिंह मुंडा, मुखिया मंगल सिंह मुंडा, धर्मेंद्र कुमार मुंडा, मोती लाल मुंडा, सोहराई मुंडा, बैकुंठ सिंह मुंडा, धर्मेंद्र संडिल, चंद्र मोहन मुंडा, अजीत मुंडा, पागू मुंडा और महावीर मुंडा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
गोष्ठी का उद्देश्य मुंडारी भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, संवैधानिक मान्यता की मांग को मजबूती देना और भाषा-संस्कृति के संरक्षण के लिए समाज को एकजुट करना रहा।

















