जनसंवाद, जमशेदपुर। जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन बिष्टुपुर कैंपस स्थित इंडोर स्टेडियम में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) इला कुमार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत योग विभाग की छात्राओं द्वारा अतिथियों एवं पदाधिकारियों का चंदन तिलक लगाकर स्वागत करने के साथ हुई। इसके बाद वाणिज्य संकाय अध्यक्ष डॉ. दीपा शरण, कुलसचिव (शैक्षणिक) डॉ. अन्नपूर्णा झा, कुलसचिव डॉ. सलोमी कुजूर, पूर्व कुलसचिव राजेन्द्र जायसवाल, खेल एवं संस्कृति विभागाध्यक्ष डॉ. सनातन दीप, आईक्यूएसी निदेशक डॉ. रत्ना मित्रा, इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. माधुरी प्रियदर्शिनी, योगाचार्य डॉ. रवि शंकर नेवार एवं शाश्वती मैती द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

स्वागत भाषण में डॉ. दीपा शरण ने सभी को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए योग को स्वस्थ जीवन का आधार बताया। वहीं डॉ. अन्नपूर्णा झा ने अपने संबोधन में कहा कि योग को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाकर शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित योगाभ्यास अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान योग विभाग की छात्राओं ने आकर्षक योग नृत्य की प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित अतिथियों और शिक्षकों ने खूब सराहा। छात्राओं की प्रस्तुति ने योग और संस्कृति के सुंदर समन्वय को प्रदर्शित किया।
योग दिवस के अवसर पर उत्कृष्ट योग प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया। विद्यार्थी वर्ग में बरनाली पात्रा, गैर-शैक्षणिक कर्मियों में सौरीश कुंडू तथा शैक्षणिक वर्ग में डॉ. अन्नपूर्णा झा को वाणिज्य संकाय अध्यक्ष डॉ. दीपा शरण द्वारा स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
योग विभाग की योगाचार्य शाश्वती मैती ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को योग प्रोटोकॉल का अभ्यास कराया। कार्यक्रम का संचालन योग विभाग के डॉ. रवि शंकर नेवार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन खेल एवं संस्कृति विभागाध्यक्ष डॉ. सनातन दीप ने दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में योग विभाग के सर्टिफिकेट कोर्स की छात्राओं, एमए योग द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर की छात्राओं, एनसीसी एवं एनएसएस स्वयंसेविकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं।








