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आंध्र भक्त श्री राम मंदिरम, बिष्टुपुर में भगवान वेंकटेश्वर एवं देवी अल्वेलमंगम्मा (महालक्ष्मी) का भव्य कल्याण महोत्सव सम्पन्न, वाई. हेमलता के नेतृत्व में 100 महिलाओं द्वारा कोलाटम रहा आकर्षण का केंद्र

By Goutam

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जनसंवाद, जमशेदपुर। आंध्र भक्त श्री राम मंदिरम, बिष्टुपुर में भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी) एवं देवी अल्वेलमंगम्मा (महालक्ष्मी) का भव्य कल्याण महोत्सव अत्यंत भक्तिभाव, दक्षिण भारतीय परंपरा और वैदिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ।

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सुबह से ही मंदिर परिसर को पुष्पमालाओं, तोरणों और आम्रपल्लवों से सजाया गया, जिसने पूरे वातावरण को दिव्य, पावन और उत्सवी बना दिया।

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✨ वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न हुआ दिव्य विवाह संस्कार

कार्यक्रम की शुरुआत पंडित कोंडामचारुलु के मार्गदर्शन में गणपति पूजन और मंडप शुद्धि से हुई। इसके बाद भगवान वेंकटेश्वर एवं देवी अल्वेलमंगम्मा के विग्रहों का भव्य श्रृंगार किया गया और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंडप में विवाह-संस्कार सम्पन्न हुआ।

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विवाह की प्रमुख रस्मों में शामिल थे—

  • वर–वधू रूप में विग्रहों की प्रतिष्ठा
  • माला व वस्त्र अर्पण
  • मंगलसूत्र विधि
  • पुष्पांजलि
  • चूर्णाभिषेक (विशेष उबटन)
  • पंचामृत स्नान
  • शोभायात्रा
  • मंडप प्रदक्षिणा
  • हवन एवं महाआरती

शंखों, घंटियों की मधुर ध्वनि और भक्तों के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने अक्षत, नैवेद्य और पुष्प अर्पित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।

💐 100 महिलाओं का कोलाटम — विशेष आकर्षण

इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहा— वाई. हेमलता के नेतृत्व में लगभग 100 महिलाओं द्वारा प्रस्तुत कोलाटम नृत्य, जो दक्षिण भारतीय परंपरा का एक महत्वपूर्ण लोकनृत्य है। प्रस्तुति ने मंदिर परिसर को आनंद, उमंग और आध्यात्मिक उल्लास से भर दिया।

👥 प्रमुख पदाधिकारी एवं भक्तों की उपस्थिति

महोत्सव में बड़ी संख्या में भक्तगण एवं मंदिर समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से मंदिर अध्यक्ष बी. डी. गोपाल कृष्णा, महासचिव दुर्गा प्रसाद शर्मा, ट्रस्टी प्रदीप नायडू, उपाध्यक्ष सीएच रमना, महेश राव, नानाजी, नरसिंह राव, डी. रामु, राज शेखर, पी. कुमार, रवि प्रकाश सहित श्रीवारी सेवा समिति के सदस्य शामिल थे।

🙏 प्रसाद वितरण के साथ सम्पन्न हुआ महोत्सव

अंत में प्रसाद वितरण के साथ कल्याण महोत्सव का विधिवत समापन हुआ। भक्तों ने इस दिव्य आयोजन को अपने जीवन-उन्नति और कल्याण का उत्सव बताया।

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