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खरसावां जगन्नाथ मंदिर में 108 कलश जल से महाप्रभु का महास्नान, 16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा

By Goutam

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जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर)। खरसावां के हरिभंजा स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा एवं सुदर्शन का वैदिक रीति-रिवाजों के साथ महास्नान कराया गया। 108 कलश पवित्र जल से हुए इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे मंदिर परिसर में “जय जगन्नाथ” के जयघोष, शंखध्वनि और उलुध्वनि से भक्तिमय वातावरण बना रहा।

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सुबह से ही मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया। सेवायतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन की प्रतिमाओं को रत्न सिंहासन से स्नान मंडप तक लाया। इसके बाद विधिवत हवन-पूजन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए।

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धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ का 35 कलश, बलभद्र का 42 कलश, देवी सुभद्रा का 20 कलश तथा सुदर्शन का 11 कलश पवित्र जल से महास्नान कराया गया। इसके अतिरिक्त अगुरु, चंदन, गाय का घी, दूध, दही, मधु एवं हल्दी सहित विभिन्न सुगंधित एवं पवित्र द्रव्यों का लेप भी अर्पित किया गया। महास्नान के इस दुर्लभ धार्मिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

इस अवसर पर मुख्य रूप से पुरोहित प्रदीप कुमार दाश, भरत त्रिपाठी, जगन्नाथ त्रिपाठी, शचींद्र कुमार दाश सहित मंदिर के सेवायत एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

अब 14 जुलाई को होगा नेत्रोत्सव, 16 जुलाई को निकलेगी रथयात्रा

प्राचीन धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद उन्हें मंदिर के ‘अनासर गृह’ में विश्राम के लिए रखा जाता है, जहां देशी जड़ी-बूटियों से उनका उपचार किया जाता है। इस अवधि को ‘अनासर काल’ कहा जाता है और इस दौरान भगवान भक्तों को दर्शन नहीं देते।

मंदिर समिति के अनुसार 14 जुलाई को भगवान पूर्णतः स्वस्थ होकर ‘नेत्रोत्सव’ के अवसर पर नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा भव्य रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी (गुंडिचा मंदिर) के लिए प्रस्थान करेंगे। रथयात्रा महोत्सव को लेकर मंदिर समिति ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

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