जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर)। शारदीय नवरात्र के अवसर पर खरसावां, कुचाई और आमदा क्षेत्र मां दुर्गा की भक्ति में डूब गया। सप्तमी तिथि पर विभिन्न पूजा पंडालों के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। पट खुलते ही मां दुर्गा के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। मां के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मंत्रोच्चार और ढाक की गूंज से भक्तिमय हुआ माहौल
सप्तमी के अवसर पर सुबह से ही पूजा पंडालों में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया। विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की गई। मंत्रोच्चार, शंख ध्वनि और ढाक की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया। पूजा पंडालों में मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमाओं के दर्शन के लिए महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों की भीड़ देखी गई। श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में शीश झुकाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
आकर्षक सजावट से जगमगाए पूजा पंडाल
खरसावां, कुचाई और आमदा के विभिन्न पूजा पंडालों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी, सुंदर सजावट और भव्य पूजा मंडप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। शाम होते ही रंगीन बिजली की रोशनी से पंडालों की रौनक और बढ़ गई। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। कई श्रद्धालु परिवार के साथ पूजा पंडालों में पहुंचकर मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं। वहीं, पूजा समितियों की ओर से पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक तैयारियां की गई हैं। पूरे क्षेत्र में दुर्गापूजा को लेकर उत्सव का माहौल है।
मां कालरात्रि की आराधना का विशेष महत्व
नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय और संकट से मुक्ति प्रदान करती हैं। इसी आस्था के साथ श्रद्धालुओं ने मां की पूजा कर अपने परिवार और समाज की मंगलकामना की।
सप्तमी पर पूजा पंडालों के पट खुलने के साथ ही दुर्गोत्सव की रौनक बढ़ गई है। अष्टमी, नवमी और विजयादशमी को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। खरसावां, कुचाई और आमदा में मां दुर्गा के जयकारों के बीच भक्ति, आस्था और उल्लास का माहौल बना हुआ है।

















