जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर)। खरसावां और कुचाई क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ की पवित्र रथ यात्रा श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ धूमधाम से निकाली गई। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा सुसज्जित रथों पर विराजमान होकर मौसीबाड़ी के लिए रवाना हुए। पूरे क्षेत्र में “जय जगन्नाथ” के जयघोष गूंजते रहे और हजारों श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
खरसावां, हाड़िभंजा, दलायकेला, पोटोबेड़ा, जोजोकुडमा तथा कुचाई प्रखंड के पोंडाकाटा, बंदोलोहर और छोटाचाकड़ी सहित कई गांवों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रथ यात्रा निकाली गई। सुबह से ही मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को रथ पर विराजमान कराया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रथ को मौसीबाड़ी तक खींचा।
रथ यात्रा के दौरान महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। ग्रामीणों ने मार्ग को आकर्षक ढंग से सजाया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
आयोजन समितियों की ओर से श्रद्धालुओं के बीच फल, लड्डू, कटहल सहित विभिन्न प्रकार के प्रसाद का वितरण किया गया। साथ ही कई स्थानों पर शीतल पेयजल और सेवा शिविर भी लगाए गए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इस अवसर पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी रथ यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। इस अवसर पर सभी समुदायों के लोगों ने एक साथ शामिल होकर भगवान जगन्नाथ की भक्ति में अपनी आस्था प्रकट की।
आयोजन समितियों और ग्रामीणों के सहयोग से सभी स्थानों पर रथ यात्रा शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुई। देर शाम तक भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

















