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वकास्त मुंडारी खूंटकट्टी रक्षा एवं विकास समिति द्वारा दलभंगा में मनाई गई भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि , संघर्ष और विरासत को किया याद

By Goutam

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जनसंवाद, खरसावां (उमाकांत कर)। वकास्त मुंडारी खूंटकट्टी रक्षा एवं विकास समिति, 39 मौजा दलभंगा के तत्वावधान में मंगलवार को दलभंगा स्थित बिरसा चौक में महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी एवं जननायक भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों एवं समिति के सदस्यों ने भाग लेकर भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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इस अवसर पर समिति के पूर्व अध्यक्ष बैकुंठ सिंह मुंडा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष और बलिदान सदैव आदिवासी समाज को प्रेरित करता रहेगा।

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समिति के अध्यक्ष मानसिंह मुंडा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए आदिवासी अधिकारों की रक्षा की, जिसके परिणामस्वरूप सीएनटी एक्ट 1908 अस्तित्व में आया। उन्होंने कहा कि इस कानून की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने खूंटकट्टी क्षेत्र में सफेद पत्थर की अवैध तस्करी पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके खिलाफ जनजागरण अभियान चलाने की आवश्यकता बताई।

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रुगुडीह पंचायत के मुखिया करम सिंह मुंडा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने ‘बिरसाइत’ धर्म की स्थापना कर समाज को एक नई दिशा दी। उन्होंने आदिवासी समाज को शराब, अंधविश्वास, जादू-टोना और पशु बलि जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का संदेश दिया था।

वहीं विधायक प्रतिनिधि धमेंद्र सिंह मुंडा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा आदिवासी अस्मिता, स्वायत्तता और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं। उनके नेतृत्व ने आदिवासी समाज को अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष करने की प्रेरणा दी तथा अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से विधायक प्रतिनिधि धमेंद्र सिंह मुंडा, समिति अध्यक्ष मानसिंह मुंडा, पूर्व अध्यक्ष बैकुंठ सिंह मुंडा, मुखिया करम सिंह मुंडा, समिति सचिव लखीराम मुंडा, मदन सिंह मुंडा, अर्जुन बेसरा, गुरुवा सिंह मुंडा, गोविंद हेंब्रम, आकाश हेंब्रम सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ।

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